दूर दराज के गांव ही नहीं, राजधानी में भी घरेलू हिंसा की महिलाएं शिकार हो रही हैं। बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में पीड़ित महिलाएं कहानी सुनाते हुए रो भी पड़ीं। एक पीड़िता ने यहां तक कहा कि ससुराल वालों ने दर्द दिया तो मायके वालों ने भी साथ नहीं दिया। जबकि उनकी मर्जी से शादी की थी। तो एक ने बताया कि कई साल तक गलत सूचना देकर शादी करने वाले पति के साथ रही, दो बच्चे भी हुए, लेकिन व्यवहार नहीं बदला। हालांकि थोड़ी खुशी इस बात की है कि बच्चे साथ रखे हैं।
दिल्ली से शादी करके पंजाब के अमृतसर गई एक महिला ने बताया कि शादी के 10 दिन बाद ही घरेलू हिंसा, दहेज के लिए शुरू हो गई थी। तेरह साल किसी तरह साथ भी रहे, लेकिन कुछ नहीं बदला। अंत में जलाने की कोशिश की तो छोड़कर आना पड़ा लेकिन अब सात महीने बाद भी मामला कोर्ट में नहीं पहुंचा है।
राजधानी में घरेलू हिंसा पर काम करने वाली पॉपुलेशन सर्विस इंटरनेशनल (पीएसआई) ने दिल्ली में सभी एजेंसियों की एक वर्कशॉप की। इसमें वजूद के नाम से शुरू किए गए इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के सचिव धर्मपाल, महिला एवं बाल विकास निदेशक सौम्या गुप्ता, पूर्व एडिशन सॉलिसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह, डीसीपी वर्षा शर्मा ने भी हिस्सा लिया।
महिला एवं लड़की को आधिकारों के प्रति जागरूक करना होगा। सरकार को संबंधित एजेंसियों के साथ कानून में सुधार करना होगा। पुनर्वास कॉलोनी में स्कूल स्तर पर सोच बदलनी होगी। घर में पत्नी के सम्मान से शुरुआत करके की परंपरा बढ़ानी होगी। -रितु कुमार, महिला एवं बाल विकास मंत्री, संदीप कुमार की पत्नी