कोविड वार्ड में काम करने वाले सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को ड्यूटी के बाद क्वारंटीन सुविधा नहीं दिए जाने के फैसले पर डॉक्टरों का सांकेतिक प्रदर्शन जारी है। शनिवार को राजधानी के एलएनजेपी, लेडी हार्डिंग, संजय गांधी समेत कई अन्य अस्पतालों के डॉक्टरों ने मोमबत्ती जलाकर विरोध जताया।
रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष शिवाजी देव बर्मन ने बताया कि दो दिनों से डॉक्टर बाजू पर काला रिबन बांधकर काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
सरकार तक अपनी बात को पहुंचाने के लिए अस्पतालों के परिसर में डॉक्टरों ने मोमबत्ती जलाकर विरोध जताया है। इसमें राजधानी की कई अस्पतालों की आरडीए के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हुआ है। शिवाजी का कहना है कि सरकार जब तक अपना फैसला वापस नहीं लेगी तब तक विरोध जारी रहेगा।
एम्स कर्मचारी की मौत पर निकाला मार्च
एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अस्पताल की कैंटीन में काम करने वाले एक कर्मचारी की मौत के बाद कैंडल मार्च का निकाला। एम्स आरडीए के महासचिव डॉक्टर राजकुमार श्रीनिवास ने बताया कि कर्मचारी की मौत होस्टल प्रशासन की लापरवाही से हुई है। इसलिए आरडीए हॉस्टल सुपरिटेंडेंट और वार्डन को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग करती है।