देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में कुत्ते और बंदर से परेशान डॉक्टरों ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को कसूरवार ठहराया है। मंगलवार को मेनका गांधी को लिखे पत्र में जहां डॉक्टरों ने कुत्तों और बंदरों की वजह से हुईं घटनाओं का जिक्र किया है। वहीं सख्त नियमों की वजह से इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिए जाने की बात भी कही है।
एम्स रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. हरजीत सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से एम्स परिसर में कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ा है। इनकी वजह से डॉक्टर, मरीज, तीमारदार और अन्य स्टाफ हर कोई परेशान है।
बीते दिनों कई मरीज और उनके तीमारदार बंदरों के हमले की वजह से गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। बावजूद इनके खिलाफ कार्रवाई करने से एम्स प्रबंधन घबरा रहा है। डॉ. हरजीत के अनुसार एम्स में हर दिन तीन से चार और महीने में तकरीबन 100 लोग इन जानवरों के शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से उन्होंने सलाह मांगी है कि एम्स परिसर को किस तरह इन जानवरों से सुरक्षित किया जाए?
उन्होंने ये लिखा है कि एम्स में इलाज कराने के लिए मरीज पहुंचता है। ऐसे में यहां आकर जानवर का शिकार होने के बाद उसे एंटी रैबीज लेना पड़ता है। चूंकि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही इलाज को लेकर मारामारी है। इस स्थिति में लावारिस जानवरों की वजह से मरीजों की परेशानी कई गुना ज्यादा बढ़ रही है। डॉक्टरों ने तंज कसते हुए ये भी लिखा है कि जानवरों से बचने के लिए एम्स को उठाकर कहीं दूसरे स्थान पर नहीं रखा जा सकता। मंत्री मैडम आप ही कोई विकल्प हमें सुझाएं?