एम्स और सफदरजंग अस्पताल आरडीए ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेजिडेंट डॉक्टरों ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। एम्स दिल्ली रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) और सफदरजंग अस्पताल आरडीए समेत डॉक्टरों के अन्य संगठनों ने राष्ट्रपति को इस संबंध में पत्र लिखा है। साथ ही छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा भी की।एम्स आरडीए का कहना है कि जंतर-मंतर की घटना की स्वतंत्र जांच, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान बल प्रयोग के आरोपों की जवाबदेही तय करने, शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। मसाथ ही कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों के चेहरे और नाम-पट्टिका ढके होने और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक प्रोफेसर एवं छात्रों के साथ कथित धमकीपूर्ण व्यवहार के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती रहने की परिस्थितियों पर स्पष्टीकरण की मांग की है। सफदरजंग आरडीए के अनुसार अगर उन्हें अपनी इच्छा के बावजूद अस्पताल छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई, तो यह मरीज की स्वायत्तता, सूचित सहमति और चिकित्सा नैतिकता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
एसोसिएशन ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम संवैधानिक स्वतंत्रताओं, बल प्रयोग और विधिसम्मत प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों पर हुई बलपूर्वक कार्रवाई की निंदा की है।