-दिल्ली सहित दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के लिए कार्यशाला हुई आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में डॉक्टरों को कंधे की आर्थ्रोस्कोपी के गुर सिखाए। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग और दिल्ली ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को डॉक्टरों के लिए कंधे की आर्थ्रोस्कोपी करने की कैडेवरिक कार्यशाला हुई। इसमें दिल्ली सहित दूसरे राज्यों के 50 से अधिक डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग प्रमुख डॉ. राहुल खरे ने बताया कि जोड़ों के ऑपरेशन में आर्थ्रोस्कोपी में बिना चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। इसके लिए सिर्फ छेद करते है। जोड़ों के अंदर आर्थ्रोस्कोप डालकर दूरबीन की मदद से सर्जरी की जाती है। उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा डॉक्टरों को देश में ही आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी के लिए तैयार करना था। जिससे उन्हें प्रशिक्षण के लिए विदेश न जाना पड़े। डॉक्टरों के सर्जरी कौशल प्राप्त करने से मरीजों को ज्यादा लाभ मिलेगा और चीर-फाड़ की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस तकनीक से मरीज को कम दर्द, कम खून बहना, टांकों की संख्या में कमी, जल्दी डिस्चार्ज और शीघ्र ठीक होने जैसे कई लाभ मिलते हैं। कंधे की आर्थ्रोस्कोपी एक जटिल प्रक्रिया है। जिसमें विशेष प्रशिक्षण और लंबे अभ्यास की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से हड्डी रोग विभाग ने डॉक्टरों को आधुनिक तकनीक में प्रशिक्षित करने की पहल की है। इस कार्यशाला के मौके पर अस्पताल के निदेशक डॉ. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विवेक दीवान और दिल्ली ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष और जीटीबी अस्पताल के निदेशक डॉ. विनोद कुमार भी मौजूद रहे। डॉ. विनोद कुमार ने कंधे की आर्थ्रोस्कोपी पर शैक्षणिक व्याख्यान भी दिया।