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#LadengeCoronaSe: कर्म के साथ मानवता का धर्म भी निभा रहे हैं डॉक्टर

Fri, 24 Apr 2020 04:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
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फर्ज के साथ-साथ मानवता भी... - फोटो : अमर उजाला
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5 घंटे ऑपरेशन कर मरीज को दी नई जिंदगी

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आंखों पर चश्मा, शरीर पर पीपीई सूट और चेहरा शील्ड से ढका था। हवा का एहसास भी नहीं हो रहा था। बस, सांस चल रही थीं और हाथ ऑपरेशन में व्यस्त थे। पूरा शरीर पीपीई सूट की गर्मी के कारण पसीने से तरबतर था, लेकिन खुद सुरक्षित रहते हुए मरीज को भी नया जीवन देना सबसे जरूरी था। रात से सुबह हो गई और करीब छह घंटे बाद जब पीपीई सूट उतारा तो मानो जैसे संजीवनी मिल गई हो। ये कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है बुधवार रात की। जब एम्स के डॉक्टर एक मरीज की जिंदगी बचाने में जुटे रहे। दरअसल, गाजियाबाद के वैशाली निवासी मरीज की आंत में छेद की वजह से स्टूल पेट में आ रहा था। आपातकालीन वार्ड में लाए गए मरीज का तत्काल ऑपरेशन करना जरूरी था। कोरोना की जांच कराने और रिपोर्ट आने का इंतजार नहीं किया जा सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने बुधवार रात 1 बजे से शुरू हुआ ऑपरेशन सुबह 6 बजे तक चला। इस दौरान एहतियात के तौर पर पूरी टीम पीपीई से कवर थी। अब मरीज सुरक्षित है और उसकी कोरोना जांच की जाएगी।  

 

गूगल ट्रांसलेशन से पहचाना यमन का युवक

डॉ. योगेन्द्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर योगेन्द्र सिंह की समझदारी और गूगल ट्रांसलेटर से एक युवक की पहचान होने का रोचक मामला सामने आया है। दक्षिण जिला डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि हरियाणा सरकार की एंबुलेंस ने 18 अप्रैल को कादरपुर, गुरुग्राम में मिले युवक को सिविल लाइन अस्पताल में भर्ती कराया था। युवक सड़क पर बेहोशी जैसी अवस्था में पड़ा हुआ था। अस्पताल में कोई भी युवक की भाषा नहीं समझ पा रहा था। वह चाय-बिस्किट ले लेता था, लेकिन रोटी नहीं खा पाता था। अस्पताल के कैजुल्टी इंचार्ज डॉ. योगेन्द्र सिंह ने विभिन्न भाषा के जानकारों को बुलाया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। घुलने-मिलने पर डा. योगेन्द्र ने युवक को अपने मोबाइल में गूगल ट्रांसलेटर खोलकर दिया और युवक से टाइप करवाया। गूगल ट्रांसलेटर से युवक की पहचान यमन निवासी यूसुफ (22) के रूप में हुई। गूगल पर यमन एंबेसी का नंबर व पता सही नहीं आ रहा था। उन्होंने दिल्ली में तैनात अपनी पत्नी डॉक्टर सरोज यादव की मदद ली। डा. सरोज ने ग्रेटर कैलाश-एक थानाध्यक्ष सोमनाथ पारूथी की मदद से युवक को एंबेसी अधिकारियों के हवाले कर दिया गया। युवक अपने भाई का इलाज कराने फरवरी में यमन से दिल्ली आया था और यहां आकर वह अपने परिवार से बिछड़ गया था। 
 

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एम्स : प्लाज्मा दान करेंगे नर्सिंग अधिकारी

aiims - फोटो : file photo
एम्स के नर्सिंग अधिकारियों ने कोरोना के इलाज में अपना योगदान देेने के लिए नई पहल शुरू की है। नर्सिंग अधिकारियों ने अस्पताल के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया को पत्र लिखकर कोरोना के इलाज के लिए अपने रक्त का प्लाज्मा दान करने की इच्छा जाहिर की है। दरअसल, प्लाज्मा तकनीक के तहत कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति के रक्त से लिया गया प्लाज्मा संक्रमित व्यक्ति पर चढ़ाया जाता है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने हाल में प्लाज्मा तकनीक का ट्रायल शुरू किया था। अस्पताल में 49 वर्षीय मरीज पर इसका ट्रायल सफल हुआ था। एम्स के नर्सिंग अधिकारी कनिष्क यादव ने बताया कि एम्स निदेशक को पत्र लिखकर उन्होंने कोरोना के इलाज के लिए उनके रक्त के प्लाज्मा को दान करने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यदि वह कोरोना से संक्रमित हो जाते हैं, तो इस बीमारी से ठीक होने के बाद वह उनके रक्त के प्लाज्मा को कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए दान करना चाहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति के खून से अधिकतम 800 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकता है। वहीं, कोरोना मरीज के शरीर में एंटीबॉडीज डालने के लिए 200 मिलीलीटर प्लाज्मा चढ़ाते हैं। 
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