कोरोना महामारी कमजोर जरूर पड़ी है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। अपने फ्रंटलाइन कोरोना योद्धाओं को कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए सरकार ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी चालू कर रखा है। लेकिन कई डॉक्टर और नर्स वैक्सीनेशन के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जिन्होंने वैक्सीन की पहली डोज तो ले ली, लेकिन दूसरी डोज के लिए सामने नहीं आए। सरकार के लिए कोरोना योद्धाओं का यह रुख चिंता का विषय बन गया है। जबकि विशेषज्ञों ने लगातार साफ किया है कि कोरोना वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसे हर व्यक्ति को आवश्यक रूप से लगवाना चाहिए।
पिछले वर्ष अक्टूबर माह में एक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसमें सभी अस्पतालों को अपने फ्रंटलाइन वारियर्स की जानकारी देनी थी। इस पर काफी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवा भी दिया था। बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी फ्रंटलाइन योद्धाओं को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इस पोर्टल पर रजिस्टर डॉक्टरों और नर्सों का ही वैक्सीनेशन कराया जा रहा है।
लेकिन जो लोग अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सके थे, उनके लिए अभी भी कोई वेबसाइट या पोर्टल उपलब्ध नहीं करवाया गया है जहां वे अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैक्सीनेशन के लिए कम संख्या में लोगों के सामने आने के पीछे इसे भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है।
वैक्सीन लगवाने के लिए डॉक्टरों-नर्सों में भी अनिच्छा को देखते हुए प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों ने अपने साथ जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों से वैक्सीन लगवाने की अपील की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने से जुड़े डॉक्टरों के लिए पहले ही इस तरह की एक अपील जारी की थी। आईएमए के अलावा इंडियन नर्सिंग काउंसिल, द ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने भी एक पत्र लिखकर अपनी नर्सों से वैक्सीन लगवाने की अपील की है।
एक तरफ जहां कुछ डॉक्टरों-नर्सों में वैक्सीन को लेकर कुछ शंकाएं बरकरार हैं तो वहीं सामान्य लोग लगातार फोन कर वैक्सीन के बारे में पता कर रहे हैं। दिल्ली सरकार की कोविड हेल्पलाइन पर लगातार फोन करके आम लोग पूछ रहे हैं कि उनके लिए कोरोना की वैक्सीन कब तक उपलब्ध हो पाएगी। इसकी कीमत क्या होगी और इसकी प्रक्रिया क्या होगी। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि वैक्सीन लगाने के बाद उनके ऊपर कोई दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।
दिल्ली सरकार की दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के कार्यालय में चल रही कोविड हेल्पलाइन पिछले साल 24 मार्च को स्थापित की गई थी। हफ्ते के सातों दिन चौबीसों घंटे काम करने वाली इस हेल्पलाइन में दस कर्मचारी लगातार काम करते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इनके फोन नंबरों पर रोजाना 70 से 80 कॉल्स सिर्फ इसलिए आ रही हैं कि उन्हें कोरोना की वैक्सीन कब तक उपलब्ध हो पाएगी।