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राष्ट्रीय मेडिकल आयोग के विरोध में देशभर के डॉक्टर, सरकार से की विधेयक में संशोधन की मांग

Wed, 24 Jul 2019 08:12 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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चिकित्सीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार खत्म करने और पारदर्शिता बरतने के लिए आ रहे राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एनएमसी) के विरोध में देशभर के डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि विधेयक में संशोधन नहीं हुआ तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल भी हो सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), एम्स आरडीए और फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) तक इस विरोध में साथ हैं। 

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मंगलवार को आईएमए की आपातकालीन कार्रवाई समिति की बैठक में एनएमसी विधेयक 2019 के खिलाफ मुहिम छेड़ने का फैसला लिया गया। आईएमए के अनुसार, जनवरी 2017 में भी यह विधेयक सदन में रखा गया था। उस विधेयक से तुलना की जाए तो केवल कॉस्मेटिक बदलाव हुए हैं। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सांतनू सेन ने कहा कि नेक्स्ट और नीट को एक करना उचित नहीं है। लाइसेंस प्राप्त परीक्षा केवल कुछ ही योग्य लोगों को मेडिकल का अभ्यास करने की इजाजत देगी, जबकि नीट मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएशन का सपना देखने वाले सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन करेगा। इस तरह एमबीबीएस ग्रेजुएशन पूरी कर चुके लगभग 50 प्रतिशत छात्र मॉर्डर्न मेडिसिन का अभ्यास नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस तरह के फैसले से आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं ही बढ़ेंगी।

उधर, दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. अमरिंदर ने कहा कि विधेयक के जरिए जिस तरह की समिति का गठन सरकार चाहती है, वह एक तानाशाही रवैये जैसा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कई तरह के संशोधन की मांग की है। इसके अलावा, एम्स के डॉक्टरों ने सदन में मौजूद सभी सांसदों से विधेयक पर चर्चा करने से पहले डॉक्टरों की मांग पर गौर करने की अपील भी की है। 
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इनके अलावा फोर्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमेध का कहना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों में 50 फीसदी सीटों पर फीस नियंत्रण से परेशानी और भी ज्यादा बढ़ेगी। देश में चिकित्सीय शिक्षा पहले से ही काफी महंगी है। हालांकि डॉ. सुमेध का यह भी कहना है कि विधेयक से जुड़े कई बिंदुओं पर सरकार ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। इसलिए विधेयक पर चर्चा से पहले इस मुद्दे पर मंत्रालय को बातचीत करना चाहिए।

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