अभी तक कोरोना के काफी मरीज भर्ती हुए हैं लेकिन हर किसी की एक जैसी स्थिति नहीं है। कई में कोरोना का काफी माइल्ड संक्रमण देखने को मिला है। सफदरजंग अस्पताल में अब तक 16 मरीज ठीक किए जा चुके हैं। जब मरीज पहली बार आता है तो वह काफी घबराया होता है। उसे लगता है कि पता नहीं क्या बीमारी उसे लग गई? वह सोचता है कि बच नहीं पाएगा लेकिन अस्पताल आने के बाद मरीज की काउंसलिंग की जाती है।
उन्हें बताया जाता है कि दो चार दिन में जांच इत्यादि करने के बाद निगेटिव रिपोर्ट मिलने पर उन्हें घर भेज दिया जाएगा। मरीजों से दिन में हर 2 से चार घंटे बाद डॉक्टर नर्स मिलने जाते हैं। ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे।
यही वजह है कि सफदरजंग अस्पताल में अब तक काफी मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। ये कहना है डॉ. नितिश गुप्ता का। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मन की बात करते हुए डॉ. गुप्ता ने बताया कि लोगों को खौफ में आने की जरूरत नहीं है। सावधानी बरतने व बचाव के नियमों का पालन करना चाहिए।
उन्होनें कहा कि जैसे सीमा पर सेना डटी हुई है वैसे ही डॉक्टर भी कोरोना की जंग से लडने के लिए डटे हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल में तीन आइसीयू वार्ड भी संचालित किए जा रहे हैं। अब 800 बेड की क्षमता वाले पूरे सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक को कोरोना अस्पताल में तब्दील किया जा रहा है। जिसमें करीब 100 आइसीयू बेड उपलब्ध कराने की तैयारी है। ये देश का सबसे बड़ा कोरोना नोडल केंद्र है। यहां कोरोना इलाज के लिए विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की एक टीम बनाई है जिसके नोडल अधिकारी डॉ. नितिश गुप्ता हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम जो भी मांग रहे हैं सरकार वह उपलब्ध करा रही है। डॉक्टर अपने कर्तव्य निभाने में लगे हैं।