satyendra jain dancing with doctors in hospital
पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री ने बृहस्पतिवार को नाचते हुए हैपिनेस थैरेपी को शुरू किया, ,लेकिन शाम होने तक अस्पताल के ही डॉक्टरों ने इसका विरोध कर दिया। इनका कहना है कि वे वार्ड में खड़ा होकर डांस नहीं करेंगे। न ही इस योजना को अन्य अस्पतालों में लागू होने देंगे।
जीटीबी और दिल्ली के अन्य सरकारी अस्पतालों के रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह नाचने से अस्पताल का माहौल खराब होगा। अस्पताल सायलेंट जोन में आता है। हालांकि इन डॉक्टरों का कहना है कि इस थैरेपी के तहत योग, मेडिटेशन, डांस और हंसना शामिल है।
डांस को छोड़ अन्य सभी विकल्प वार्ड में मरीजों के लिए शुरू किए जा सकते हैं, लेकिन डॉक्टरों के लिए वार्ड में नाचना गलत है। डॉक्टर बनने के लिए एक विद्यार्थी को कई वर्षों का परिश्रम करना पड़ता है। वह मरीजों के इलाज करने के लिए डॉक्टर बनता है न कि दिल्ली सरकार के अनुसार अस्पताल में नाचने के लिए।
वहीं रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. आनंद चोपड़ा का साफ कहना है कि डॉक्टरों पर मरीजों का वैसे ही बहुत दबाव रहता है। ऐसे में डॉक्टरों को नाचने के लिए कहा जाएगा तो उससे अस्पताल का माहौल खराब होगा। अस्पताल के एक और रेजीडेंट डॉक्टर ने कहा कि कोई भी डॉक्टर वार्ड में नहीं नाचेगा। रहा सवाल मरीजों के साथ मधुर संबंध स्थापित करने का, तो इसके लिए और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
दिल्ली गेट स्थित लोकनायक अस्पताल के एक डॉक्टर का कहना है कि आमतौर पर कोई भी डॉक्टर अस्पताल में मरीज से झगड़ा नहीं करता। न ही उसके तीमारदारों से मारपीट करता है। डॉक्टर का काम मरीजों की सेवा करना है। जीबी पंत व डीडीयू के रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी इसका विरोध जताया है।
इनका कहना है कि जिस तरह से अस्पताल के कुछ अधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री की नजर में आने के लिए तेज आवाज में गाने बजाए और डांस किया, वह बेहद शर्मनाक है। शीर्ष प्रशासनिक पद पर बैठे वरिष्ठ डॉक्टरों को ये शोभा नहीं देता। वीडियो में इनके चेहरे और ठुमके साफ नजर आ रहे हैं।