गुड़गांव में बदतर लिंगानुपात को सुधारने में स्वास्थ्य विभाग जुटा है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए अब एक-एक गर्भवती महिलाओं को ट्रैक किया जाएगा।
सबसे ज्यादा निगरानी उन महिलाओं पर की जाएगी, जिनकी पहले एक या दो बेटियां हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी महिलाओं से आशा वर्कर व एएनएम संपर्क में रहेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पानीपत जिले से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत हरियाणा में लिंगानुपात सुधारने की कवायद 22 जनवरी से शुरू करेंगे।
हरियाणा सरकार भी कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सख्त हिदायत दे रहा है। पीएनडीटी (प्री-नेटल डायगभनोस्टिक टेक्निक) के तहत और सख्ती बरती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि लिंगानुपात गिरने की वजह जिले में कन्या भ्रूण हत्या है। इसमें अल्ट्रासाउंड केंद्र अहम किरदार निभा रहे हैं। नतीजतन, प्रति एक हजार लड़कों पर 837 लड़कियां हैं।
इनमें ग्रामीण महिलाओं की संख्या अधिक है। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को आशा वर्कर विश्वास में लेकर ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्रों का पता लगाएगी।
जहां पर कन्या भ्रूण की पहचान का काम हो रहा है। बता दें कि पूरे जिले में 167 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। जिसमें 163 प्राइवेट हैं।
अल्ट्रासाउंड केंद्र पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने सीसीटीवी लगाने का आदेश दिया है। इसके लिए उपायुक्त ने धारा-144 भी लगा रखी है।
बताना होगा कारण
जिला स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को भी स्पष्ट आदेश दिए है कि अगर किसी मरीज का अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है तो डॉक्टर को लिखना होगा कि आखिर वह क्यों अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। वहीं, अल्ट्रासाउंड केंद्र को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए है कि फॉर्म में दिए गए 23 बिंदुओं में इसका स्पष्ट उल्लेख हो।
डॉ. पुष्पा बिशभनोई, सिविल सर्जन
- कन्या भ्रूण हत्या सुधारना प्राथमिकता है। इसके लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सभी गर्भवती महिलाओं को ट्रैक किया जाएगा। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निगरानी है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।