पारस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश अग्रवाल का कहना है कि यह एक असाधारण स्थिति है, जो दिमाग और तंत्रिका पर असर डालती है। इससे शरीर में कमजोरी पैदा होती है, जो वक्त के साथ बढ़ती जाती है।
ये बीमारी हमेशा जानलेवा होती है और जीवनकाल सीमित बना देती है। हालांकि कुछ लोग ज्यादा जीने में कामयाब हो जाते हैं, हॉकिंग के मामले में ऐसा ही हुआ था।
फोर्टिस अस्पताल के डॉ. परवीन गुप्ता कहते हैं कि इस बीमारी के औसतन महीने में 6-8 मरीज आते हैं। यह आमतौर पर 50-60 आयु वर्ग के बीच के अधिक होते हैं। इस बीमारी का कोई इलाज मौजूद नहीं है लेकिन ऐसे इलाज मौजूद हैं जो रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने वाले इसके असर को सीमित बना सकते हैं।
मोटर न्यूरॉन बीमारी असाधारण स्थिति है, जो आम तौर पर 60 की उम्र में हमला करती है लेकिन ये सभी उम्र के लोगों को हो सकती है।
- एड़ी या पैर में कमजोरी महसूस होना
- बोलने में दिक्कत होने लगती है और कुछ तरह का खाना खाने में भी परेशानी होती है
- पकड़ कमजोर हो सकती है
- हाथ से चीजें गिर सकती हैं
- वजन कम होने लगता है
- हाथ और पैरों की मांसपेशी वक्त के साथ पतली होने लगती हैं
- रोने और हंसने को काबू करने में दिक्कत होती है