-सामान्य लक्षण दिखने से 20 साल पहले भी शुरू हो सकती है बीमारी
समय पर डॉक्टर से सलाह जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। याददाश्त कमजोर होना या सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह अल्जाइमर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बीमारी के सामान्य लक्षण सामने आने से करीब 20 साल पहले भी इसके बदलाव शुरू हो सकते हैं। विश्व अल्जाइमर दिवस के मौके पर रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में सोमवार को निजी अस्पताल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने लोगों को दिमागी सेहत पर खुलकर बात रखीं।
इस कार्यक्रम में पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री लारा दत्ता ने कहा कि अल्जाइमर सिर्फ मरीज की याददाश्त और आत्मनिर्भरता को प्रभावित नहीं करता बल्कि पूरे परिवार पर इसका गहरा असर पड़ता है। न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत बंगा ने कहा कि अल्जाइमर केवल याददाश्त जाने तक सीमित नहीं है। यह धीरे-धीरे बढ़ने वाली जटिल बीमारी है, जो सोचने-समझने, बातचीत करने, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम खुद करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. साहिल कोहली ने कहा कि शुरुआती लक्षणों पर समय से डॉक्टर से सलाह लेने से परिवार बीमारी को समझकर देखभाल की बेहतर योजना बना सकता है।