क्या आप सोच सकते हैं कि दिल्ली के विकास कार्य को कोई सरकारी लापरवाही नहीं बल्कि भगवान भी रोक सकते हैं। अगर नहीं तो ये खबर आपको हैरान कर सकती है।
दिल्ली में पिछले काफी समय से 25 किलोमीटर लंबे सिग्नल फ्री कॉरीडोर बनाने का काम अटका पड़ा है। इस कॉरीडोर का काम अटकने के पीछे प्राशासनिक लापरवाही वजह नहीं है बल्कि भगवान के बीच में आने से इसका काम रुक गया है।
आपको बता दें कि दिल्ली के विकासपुरी इलाके से वजीराबाद तक सिग्गन फ्री कॉरीडोर बनाने की योजना बनाई गई थी। उस वक्त तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखा गया था, लेकिन ये कभी नहीं सोचा गया कि इस कॉरीडोर को बनाने में भगवान ही रोड़ा बनकर खड़े हो जाएंगे।
साभार: सभी फोटो, मेल टुडे
अब तक हो चुका है 100 करोड़ का नुकसान
25 किलोमीटर का ये प्रोजेक्ट दिल्ली के लिए बेहद महत्वकांक्षी कार्ययोजना है। वहीं उत्तर पूर्वी दिल्ली पश्चिमी दिल्ली को जोड़ने वाले इस लिंक रोड में 10 धार्मिक पूजन केन्द्र अहम रोड़ा बने हुए हैं।
इस कॉरीडोर के बनने में हो रही देरी की वजह से पीडब्ल्यू डी डिपार्टमेन्ट को रोजाना 50 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन धार्मिक इमारतों में एक मंदिर, चर्च और गुरुद्वारे की इमारत जनकपुरी जिले के नजदीक है
जहां निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ये कार्य पिछले 6 महीने से रूका हुआ है जिसका मतलब लगभग 100 करोड़ रुपयों का नुकसान भगवान के बीच में आने से हुआ है।
ध्वस्त किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ
एक चर्च और आर्य समाज मंदिर कांगरा समाज के नजदीक विकासपुरी और मंगोलपुरी की सर्विस लेन पर अतिक्रमण में आ रही है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मंदिर के एक हिस्से को काम करने की वजह से ध्वस्त कर चुके हैं, लेकिन आर्य समाज के लोगों ने उसे दोबारा बना दिया है।
इसी तरह से कैरिजवे के दूसरी तरफ बना गुरुद्वारा भी मुश्किलें पैदा कर रहा है। ये इस प्रोजेक्ट का पहला फ्लाइओवर है जो कि विकासपुरी को मीरा बाग से जोड़ता है।
इसी तरह से दूसरी ओर मधुबन चौक से मकरबा चौक तक दो मंदिरों की वजह से काम रुका हुआ है। इंजीनियर्स की मानें तो इसके अलावा पांच मंदिर और हैं जो प्रोजेक्ट के बीच रोड़ा बने हुए हैं।
अधर में लटका है काम
चार टुकड़ों और छह फ्लाइओवर्स को लेकर बनाया जाने वाला ये प्रोजेक्ट फिलहाल अधर में लटका हुआ है। वैसे आधा काम मई 2015 तक पूरा करना था, लेकिन इस 2015 आखिर तक बढ़ा दिया गया है।
अगर स्थिति में यदि बदलाव नहीं होता है तो इसे और आगे बढ़ाना पड़ सकता है। अलग-अलग चार हिस्सों में पहला विकासपुरी से मीरा बाग, दूसरा हिस्सा मंगोलपुरी से मधुबन चौक, तीसरा मधुबन चौक से मकरबा चौक और फिर यहां से वजीरराबाद तक बंटा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक सरकारों के आने-जाने से भी इस काम में देरी हुई है क्योंकि धार्मिक संस्थानों के अवैध कब्जे को वो भी हटवाना नहीं चाहती।
ये पूरा प्रोजेक्ट 3000 करोड़ रुपए का है और अगर ये बन जाता है तो नोएडा से ये वेस्ट दिल्ली और आउटर दिल्ली को जोड़ेगा। फिलहाल पीडब्ल्यूडी इस मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली सरकार की धार्मिक समिति के पास ले गई है।