दिल्ली सरकार के बजट में लास्ट माइल कनेक्टविटी के लिए 905 इलेक्ट्रिक फीडर वाहनों का जो प्रावधान किया गया है, उसके परिचालन का जिम्मा दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) के पास होगा। डीएमआरसी इसे मेट्रो स्टेशन से पांच किलोमीटर के दायरे के रूट पर चलाएगी। जिन रूट पर यह चलेगा, वहां फ्रीक्वेंसी पांच-पांच मिनट की होगी। डीएमआरसी इसका एक प्रस्ताव सरकार को पहले ही भेज चुकी है।
डीएमआरसी इलेक्ट्रिक फीडर वाहनों को चलाने के लिए अलग कंपनी बनाएगी। इसे क्लस्टर स्कीम के बसों की तर्ज पर चलाया जाएगा। यानी परिचालन के लागत में जो अंतर आएगा, उसकी भरपाई सरकार करेगी।
इसे लेकर सरकार के पास जो प्रस्ताव आया है, उसमें दो तरह के वाहन होंगे। एक जिसमें 7 से 8 सीट होगी। दूसरी में 20 तक सीट हो सकती है। इन वाहनों में मेट्रो स्मार्ट कॉर्ड से किराया भुगतान की सुविधा होगी। यह फीडर वाहन कंडक्टरलेस होंगे।
सरकार के वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो तो डीएमआरसी ने अभी तक 47 रूट का अध्ययन किया है। इसमें सीएनजी और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के वाहनों का प्रस्ताव दिया है। मगर दिल्ली सरकार ने बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रावधान है। इसे क्लस्टर के तर्ज पर चलाया जाएगा , यानी एक क्लस्टर में 100 वाहन होंगे। सीएनजी से इलेक्ट्रिक वाहन के दाम में जो अंतर होगा, वह पैसा सरकार देगी।