दिल्ली मेट्रो ने सौर ऊर्जा से चलने वाली पहली मेट्रो का दर्जा तो हासिल कर लिया है, साथ ही डीएमआरसी अगले साल तक सौर ऊर्जा उत्पादन में एक और कीर्तिमान स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। खास बात यह है कि मेट्रो नेटवर्क के जरिये डीएमआरसी अगले साल तक सौर ऊर्जा से 50 मेगा वाट बिजली पैदा करेगी, जिससे डीएमआरसी पर पड़ रहा बिजली का खर्च कम होगा। इस योजना के तहत ब्लू लाईन और रेड लाईन के नए सेक्शन पर सौर ऊर्जा पैनल लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
डीएमआरसी सूत्रों के अनुसार वर्तमान में दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाईन के नए सेक्शन नोएडा सिटी सेंटर-नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी और रेड लाईन के दिलशाद गार्डन-शहीद स्थल गाजियाबाद सेक्शन को हाल ही में यात्रियों के लिए खोला गया है। इन दोनों सेक्शन पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सोलर पैनल लगाने का कार्य तेजी पर है। जल्द ही इन सेक्शन पर सोलर पैनल लगा दिए जाएंगे। ब्लू लाईन के नए सेक्शन पर नोएडा सेक्टर 34, सेक्टर 52, सेक्टर 61, सेक्टर 59, नोएडा सेक्टर 62 और नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी छह मेट्रो स्टेशन हैं। वहीं रेड लाईन के नए सेक्शन शहीद नगर, राग बाग, राजेंद्र नगर, श्याम पार्क, मोहन नगर, अर्थला, हिंडन रिवर और शहीद स्थल नया बस अड्डा आठ मेट्रो स्टेशन हैं।
मेट्रो के फेज-3 की सभी इमारतों, स्टेशनों पर लगे सोलर पैनल
ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली मेट्रो के फेज-3 के तहत सभी बिल्डिंग, स्टेशनों और डिपो में सोलर पैनल लगाए गए हैं। इन सभी जगहों से वर्तमान में डीएमआरसी कुल 27 मेगा वाट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रही है। इस बिजली की मात्रा दिनभर में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर प्रयोग होने वाली बिजली का कुछ ही हिस्सा है, लेकिन अगले साल तक डीएमआरसी सोलर पैनल सिस्टम को और मजबूत कर लेगी। इस योजना के तहत अगले साल तक डीएमआरसी दिल्ली-एनसीआर में लगाए जाने वाले सोलर पैनलों से 50 मेगा वाट बिजली का उत्पादन करेगी।
डीएमआरसी का कहना है कि अगले साल तक डीएमआरसी की खुद की सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी। उसके बाद मध्य प्रदेश के रीवा से प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा और डीएमआरसी द्वारा उत्पादित 50 मेगावाट सौर ऊर्जा से दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर एक दिन में खर्च होने वाली बिजली का 60 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा का होगा। ऐसा होने से अगले साल डीएमआरसी प्रतिदिन लगभग 40 फीसदी ऊर्जा बिजली कंपनियों के माध्यम से प्राप्त करेगी। डीएमआरसी की मानें तो आने वाले कुछ सालों में दिल्ली मेट्रो को पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलाया जाएगा। दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर एक साल में लगभग 109.2 करोड़ यूनिट का खर्च होता है और रीवा से एक साल में लगभग 345 करोड़ यूनिट सौर ऊर्जा प्राप्त होगी।