बृहस्पतिवार को पूरा फरीदाबाद शहर उजाले के नाम रहा। दीपों की आभा के बीच अमावस ओझल हुई। घर-आंगन दीपों की रोशनी से जगमग हुए तो मॉल, फैक्ट्रियां और बाजार बिजली की झालरों से झिलमिला उठे। तरह-तरह की मिठाइयां, आतिशबाजी और लोगों के प्यार से प्रकाश पर्व की खुशियां कई गुना बढ़ गईं।
शाम को पूजा स्थल पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा से पहले सिंदूर से श्री गणेशाय नम:, स्वास्तिक, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक मंत्र लिखे गए। दीप जलाकर लक्ष्मी को प्रिय कमल के फूल चढ़ाए गए।
लक्ष्मी और गणेश की प्रसन्नता के लिए कमलगट्टे की माला से ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जाप किया गया। लोगों ने गणपति से विघ्नबाधा दूर करने तो लक्ष्मी से धन, ऐश्वर्य के लिए आशीर्वाद मांगा।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश के साथ ही इंद्र और कुबेर भी पूजे गए। अनेक मंदिरों में भी पूजन-अनुष्ठान का क्रम आधी रात के बाद तक जारी रहा। आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा पूरी होने के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। बच्चों ने रंगबिरंगी रोशनी वाली फुलझड़ियां छुड़ाईं तो युवाओं में तेज आवाज वाले पटाखों को छुड़ाने की होड़ रही। कई जगहों पर सामूहिक रूप से भी आतिशबाजी की गई।
परंपरा के मुताबिक दीपावली के दीप से काजल भी उतारा गया। लक्ष्मी प्रतिमा के दोनों ओर एक-एक दीपक जलाकर उसे दूसरे दीपक से ऐसे ढंककर रखा गया जिससे ऊपर वाले दीपक में काजल उतर जाए। दीपावली पर तिकोना पार्क स्थित वैष्णो देवी, काली मंदिर, शिव मंदिर एवं एक नंबर स्थित हनुमान मंदिर में भव्य पूजा अर्चना हुई।