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Divya Kala Mela: दिव्यांग महिलाएं छूकर पहचान लेती हैं दर्द, दिल्ली की मीनू जैन की चाट के सभी हुए मुरीद

Tue, 06 Dec 2022 04:38 AM IST
आकाश दुबे आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पहली बार दिव्यांग हस्तशिल्पियों, कलाकारों के लिए इंडिया गेट पर दिव्य कला मेले की शुरूआत की गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन नेशनल हैंडीकैप्ड फाइनेंस एंड डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन (एनएचएफडीसी) के सहयोग व देखरेख से इसे आयोजित किया गया है।
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कला मेला (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देशभर के दिव्यांगजनों को कर्तव्य पथ पर आयोजित दिव्य कला मेले में बेहतरीन मार्केटिंग प्लेटफार्म मिला है। यहां इनके शिल्प कौशल व उत्पादों को सराहा व खरीदा जा रहा है। 22 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 200 दिव्यांग कारीगर व उद्यमियों ने यहां पर स्टाल लगाकर अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया है। घर की साज सज्जा, ऊनी, सूती व रेशमी कपड़े, विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ, ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री, जूट से बने सामान, हस्तशिल्प व हथकरघा के सामान, पश्मीना शॉल, जूते, ज्वैलरी, लकड़ी के सामान, खिलौने और हर राज्य के खाने पीने के 26 स्टाल लगाए गए हैं। सुबह 11 बजे से रात को आठ बजे तक मेला चल रहा है। रोजाना शाम को रंगारंग सांस्कृति कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। सोमवार शाम को कासिफ निजामी की टीम ने कव्वाली प्रस्तुत की। नृत्य व संगीत की गतिविधियां भी आयोजित की गईं।

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पहली बार दिव्यांग हस्तशिल्पियों, कलाकारों के लिए इंडिया गेट पर दिव्य कला मेले की शुरूआत की गई है, दिन बीतने के बाद शाम होते ही कर्तव्यपथ की रंगबिरंगी लाइटों के बीच यह मेला और खिल जाता है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन नेशनल हैंडीकैप्ड फाइनेंस एंड डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन (एनएचएफडीसी) के सहयोग व देखरेख से इसे आयोजित किया गया है। मंत्रालय की दिव्यांगजन स्कीम के तहत इन कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर हुनर दिखाने का मौका मिला है। एनएचएफडीसी के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार ने बताया कि किसी देश की ताकत देखनी है तो उस देश के सबसे कमजोर तबके के विकास की तरफ देखना चाहिए। इंडिया गेट पर आकर अपने देश के दिव्यांगजनों की ताकत को देखा जा सकता है। सात दिसंबर तक मेला चलेगा।

दिव्यांग महिलाएं छूकर पहचान लेती हैं दर्द
मेले में हौज खास से एनएबी इंडिया नाम से दृष्टिबाधित महिलाओं के समूह ने स्टाल लगाया है, ये किसी शरीर को छूकर दर्द पहचान लेती हैं। विशेष थेरेपी के माध्यम से उस दर्द को खत्म करने का हुनर जानती हैं। यहां 22 राज्यों के ब्लाइंड आर्थोपैडिक कलाकार आए हैं। जुनैद अली और सपना जापानी मैनुअल थेरेपी के माध्यम से शरीर का दर्द पहचान लेती हैं, नसों को दबाकर 20 मिनट थेरेपी कर दर्द से निजात दिलाती हैं। कई दिव्यांग यहां पर अपने उत्पाद को बनाकर भी लोगो को दिखा रहे हैं।
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दिल्ली की मीनू जैन की चाट खा रहा पूरा देश
देशभर में करीब 40 हुनर हाट में शामिल होकर दिल्ली की मीनू जैन ने करीब पूरे देश को अपनी चाट का मुरीद बना लिया है। वो दिव्य कला मेले में अपनी कुल्फी, केसरिया दूध, छोले भटूरे, पाव भाजी व कई प्रकार की चाट लेकर हाजिर हैं। मेले में देश के हर हिस्से के मशहूर खानपान मौजूद हैं। यहां खाट बिछी है, गुनगुनी धूप में लोग इंटिया गेट परिसर में इत्मिनान से बैठकर खानपान का मजा ले रहे हैं। लिट्टी चोखा, बिरयानी, रोल, पाव भाजी, मिठाइयों व मांसाहारी खाने की कई बैरायटी यहां उपलब्ध हैं।

देशभर में 10 जगह ऐसे मेले लगाए जाएंगे
एनएचएफडीसी के अध्यक्ष राजन सहगल ने बताया कि इंडिया गेट के बाद 10 अन्य शहरों में भी दिव्य कला मेला आयोजित होगा। पहले मेले की सफलता से दिव्यांग कलाकारों के मनोबल को पंख लगा है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार इन्हें देशभर में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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