मेवात के नूंह से चौधरी जाकिर हुसैन को टिकट दिए जाने से चौटाला की पार्टी इनेलो में बगावत हो सकती है। पार्टी का एक धड़ा पहले से इन्हें विधानसभा चुनाव में उतारने का विरोध करता रहा है।
यहां तक चर्चा है कि जाकिर को टिकट देने पर विरोध में पार्टी के कुछ नेता अलविदा कर दूसरे दल में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले जाकिर हुसैन इनेलो के टिकट पर गुड़गांव संसदीय सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा के राव इंद्रजीत सिंह के मुकाबले दूसरे नंबर पर रहे थे।
उस वक्त भी कुछ लोगों ने इन्हें टिकट देने का विरोध किया था। बाद में उनमें से कई इनके प्रचार में आ गए थे। विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होने पर उन्होंने भी टिकट का दावा ठोंक दिया था।
जाकिर को टिकट देने पर वे फिर मुखालफत में आ सकते हैं। इनमें तीन प्रमुख नेता शामिल हैं। वे एकजुट होकर उनमें से किसी एक को टिकट देने की मांग कर रहे थे। कहते हैं कि इसके लिए अभय चौटाला के पास दरखास्त भी दी थी। उनके बारे में चर्चा है कि टिकट नहीं मिलने की स्थिति में वे बीजेपी में जा सकते हैं। वे इसके नेताओं के निरंतर संपर्क में भी हैं।
पंचायत कर ठोंकी टिकट की दावेदारी
भाजपा के मेवात जिलाध्यक्ष रामावतार सिंगला ने 'अमर उजाला' से बातचीत में माना है कि उन्होंने पार्टी में शामिल करने को आवेदन दिए हैं। लेकिन इस पर पार्टी की 13 सदस्यीय कोर कमेटी फैसला लेगी। जल्द ही इसकी बैठक होने वाली है।
बुधवार को बातचीत में तीन में से दो ने इनेलो में ही रहने की बात कही। जबकि एक के पक्ष में पंचायत कर टिकट की दावेदारी ठोंकी गई है।
पिछले विधानसभा चुनाव में इनेलो ने यहां से अपने जिलाध्यक्ष बदरूद्दीन को लड़ाया था। वह चौथे नंबर पर रहे थे। जबकि वहां से सिटिंग एमएलए इनेलो के हामिद हुसैन को टिकट नहीं मिलने के विरोध में उन्होंने आजाद उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ा था और तीसरे नंबर पर रहे थे।
इस बार टिकट की दावेदारी हामिद के बेटे भी कर रहे थे। वह और जाकिर रिश्ते के भाई हैं। उनके अलावा आठ और दावेदार लाइन में बताए गए हैं। निश्चित है जाकिर के नाम की घोषणा से उन्हें झटका लगा होगा।
एक नजर में जाकिर हुसैन
52 वर्षीय जाकिर हुसैन मेवात के कद्दावर राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। वह तैय्यब हुसैन के बेटे हैं। जाकिर दो बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में वह बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर गुड़गांव लोकसभा का चुनाव लड़ा था। जिसमें वह दूसरे नंबर पर थे।
2014 के लोकसभा चुनाव में वह इंडियन नेशनल लोकदल के टिकट पर गुड़गांव लोकसभा का चुनाव लड़े थे, पर दूसरी बार भी हार गए। उन्हें भाजपा के राव इंद्रजीत सिंह ने शिकस्त दी थी। वह फरीदाबाद से भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
अब जाकिर के धैर्य और किस्मत दोनों की परीक्षा है। इस बार चुनाव में जाकिर की जीत और हार उनके राजनीतिक कॅरियर की दशा और दिशा तय करेगी।
अवतार भड़ाना लड़ सकते हैं सोहना से
कांग्रेस छोड़कर एक दिन पहले इनेलो का दामन थामने वाले फरीदाबाद के पूर्व सांसद अवतार भड़ाना सोहना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस क्षेत्र में उनके स्वजातियों का करीब 30 हजार वोट है। अब से पहले यहां से रोहताश खटाना, सतबीर खटाना, चाकिर हुसैन सहित करीब दस लोग टिकट की दौड़ में शामिल थे।
बृहस्पतिवार को नूंह से जाकिर के चुनाव लड़ाने के ऐलान के बाद अवतार भड़ाना का नाम यहां तेजी से चलने लगा है। इस बारे में पूछने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला ने स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा। लेकिन यह जरूर कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है। इसके साथ उन्होंने कहा कि हर सीट पर उनके आठ से दस दमदार लोग टिकट की दौड़ में हैं।
जिनमें चुनाव जीतने की क्षमता है। दूसरी तरफ भड़ाना के सोहना से लड़ने को लेकर इस लिए भी दलील दी जा रही है कि केंद्र में मंत्री बनने के बाद कृष्णपाल गुर्जर का पार्टी और फरीदाबाद में कद बड़ा हो गया है।
भड़ाना और कृष्णपाल एक ही बिरादरी के होते हुए भी, इनमें के बीच व्याप्त राजनीतिक प्रतिद्वंता सर्वविदित है। ऐसे में सेफ साइड अवतार भड़ाना अवश्य ढूंढना चाहेंगे। बृहस्पतिवार को सोहना इलाके में गुर्जरों की एक बड़ी पंचायत भी हो रही है।