फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुलासे पर खुलासे, आखिर कब होगी यादव की गिरफ्तारी

विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के विभन्न संगठनों ने यादव सिंह द्वारा काली कमाई के विरोध में शुक्रवार को संयुक्त पदयात्रा निकाली। जबकि कुछ अन्य संगठनों ने प्राधिकरण गेट पर प्रदर्शन कर यादव सिंह की गिरफ्तारी की मांग की। शुक्रवार को पदयात्रा नोएडा स्टेडियम के गेट नंबर तीन से शुरू हुई और नोएडा प्राधिकरण के गेट पर समाप्त हुई।
विज्ञापन


उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपाधीक्षक हर्षवर्धन भदौरिया को सौंपा। ज्ञापन में यादव सिंह समेत जिले के सभी सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति की एसआईटी से जांच कराई जाए। इसके अलावा किसान महासंघ और पश्चिमी प्रदेश निर्माण मोर्चा ने भी नोएडा प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन किया। इनकी मांग थी कि यादव सिंह को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही तीनों प्राधिकरण में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की संपत्ति की जांच हो। इस दौरान डॉ. रूपेश वर्मा, सरदाराम भाटी, सतपाल यादव, हरेंद्र खारी आदि मौजूद रहे।

फ्लैट खरीदार भी करेंगे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल की मांग को लेकर नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार और महासचिव श्वेता भारती ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गाजियाबाद, गुड़गांव आदि शहरों के फ्लैट खरीदारों से बड़ी संख्या में हिस्सा लेने की अपील की है।
विज्ञापन

बर्खास्तगी भी हो सकती है यादव सिंह की

नोएडा प्राधिकरण ने आयकर विभाग को पत्र लिखकर अब तक मिले सबूतों के आधार पर रिपोर्ट मांगी है। कानून के जानकार मानते हैं कि जिस तरह से यादव सिंह चारो तरफ से कानून के शिकंजे में फंसते जा रहे हैं, जिससे उनका सस्पेंशन और बर्खास्तगी तक हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण की तरफ से आयकर विभाग को पत्र लिखा गया है, जिसमें कहा गया है कि छापे के आधार अगर कोई रिपोर्ट तैयार की गई है तो वो प्राधिकरण को भी उपलब्ध करा दी जाए, जिससे प्राधिकरण विभागीय कार्रवाई कर सके।

वहीं, प्राधिकरण ने यादव सिंह को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह से दफ्तर में न आने का कारण पूछा है। तीन दिन में जवाब न मिलने पर प्राधिकरण विभागीय कार्रवाई कर सकता है।  27 नवंबर को छापे के बाद से वो दफ्तर नहीं आ रहे हैं। 28 को यादव सिंह को कार्मिक विभाग से संबद्ध कर दिया गया है। प्राधिकरण के इन कदमों से यादव सिंह पर निलंबन की कार्रवाई के आसार बढ़ गए हैं। अगर आयकर की रिपोर्ट में आरोप साबित हुए तो बर्खास्तगी भी हो सकती है।

निलंबन की मांग को लेकर अर्द्धनग्न प्रदर्शन

यादव सिंह के निलंबन की मांग को लेकर शुक्रवार को करप्शन फ्री इंडिया के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पर अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी बच्चू सिंह को सौंपा।

संस्था के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने कहा कि यादव सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने के बावजूद भी अभी तक प्रदेश सरकार ने निलंबित उन्हें नहीं किया है।

उन्होंने पूर्व सरकार के कार्यकाल में बने राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल और जिला अस्पताल समेत बड़ी योजनाओं की जांच की मांग की। तीनों प्राधिकरणों में लंबे समय से तैनात अधिकारियों की सीबीआई जांच की जाए। इस मौके पर सतीश कनारसी, अरुण भाटी, जगदीश जाटव, अखिलेश नागर, मोहित, सौरभ, नरेंद्र नागर, दिनेश नागर, सुनील प्रधान, मदन भाटी, दिनेश भाटी, सीताराम मौजूद रहे।

प्राधिकरण कर्मियों पर रहेगी ‘बिग बॉस’ की नजर

यादव सिंह के मामले से धूमिल छवि को सुधारने के लिए प्राधिकरण एक और कदम उठाने जा रहा है। कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए प्राधिकरण में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि लापरवाह और घूसखोर कर्मचारियों पर नजर रखी जा सके।

नोएडा प्राधिकरण के आला अधिकारियों की शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें यह निर्णय लिया गया कि आवासीय भूखंड, आवासीय भवन, ग्रुप हाउसिंग, संस्थागत, व्यावसायिक, उद्योग, नियोजन, भू-लेख विभागों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे इस तरह से लगेंगे कि ऑफिस के एक-एक कोने को कैमरे में कैद किया जा सके।

इसकी मॉनिटरिंग प्राधिकरण के आला अफसर खुद करेंगे। किसी विभाग में आम जनता की भीड़ दिखने या काम छोड़कर मौज-मस्ती कर रहे कर्मचारियों पर सीधे नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा पब्लिक का काम करने की एवज में घूस लेने वालों पर सीधी नजर रहेगी। प्राधिकरण के एसीईओ अखिलेश सिंह ने बताया कि सीसीटीवी लगाने का काम अगले सप्ताह से शुरू किया जा सकता है। प्राधिकरण में सुरक्षा के लिहाज से अब तक सिर्फ गेट पर सीसीटीवी हैं। अधिकारियों के कमरों में सीसीटीवी नहीं लगेंगे।

बिल्डर प्रोजेक्टों में है यादव सिंह की हिस्सेदारी

यादव सिंह के लॉकर खुलने का क्रम जारी है। इनमें से बिल्डर व ठेकेदारों को दिए गए टेंडर व जमीन आवंटन संबंधित दस्तावेज मिले हैं। विभाग इनकी जांच कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के करीब 50 नामी बिल्डर ऐसे हैं जिनमें किसी न किसी नाम से उनकी हिस्सेदारी है।

इन प्रोजेक्टों से कई वर्षों तक रकम आती रहेगी। यादव सिंह और उनके सहयोगियों ने मिलकर 40 बोगस कंपनियां बनाई थीं। उन्होंने प्राधिकरण की जमीन सस्ते में इन कंपनियों को आवंटित करा दी।

इसके बाद इन कंपनियों ने ऊंचे दामों पर बिल्डरों को जमीन बेच दी। वहीं, कुछ ऐसे बिल्डर भी हैं, जिनसे सांठगांठ कर यादव सिंह ने सस्ती दरों पर बिल्डरों को जमीन आवंटित की। यही नहीं एकमुश्त राशि लेकर इनकी बैंकों में ईएमआई बनवा दी, ताकि आगे भी सिंह उनसे बेनामी रकम वसूल की जा सके।

पांच लाख तक की संपत्ति पर भी आयकर की नजर

अब पांच लाख रुपये तक की कीमत वाली संपत्ति पर भी आयकर विभाग की नजर रहेगी। आयकर ने रजिस्ट्री विभाग से शहर में पांच लाख रुपये तक की संपत्तियों का ब्योरा भी मांग लिया है। इससे पहले 30 लाख या इससे अधिक कीमत की संपत्तियों का विवरण ही आयकर को जाता था। आयकर विभाग द्वारा किए गए बदलाव का कारण यादव सिंह ही माने जा रहे हैं।

आयकर विभाग की तरफ से 1 दिसंबर को सरकारी आदेश जारी किया गया है, जिसमें पांच लाख रुपये या इससे अधिक कीमत की संपत्ति की रजिस्ट्री का ब्योरा मांगा गया है। आदेश की प्रतिलिपि शुक्रवार को रजिस्ट्री विभाग को मिली है। आयकर ने संपत्ति का ब्योरा देने का प्रोफार्मा भी बदल दिया है।

अब पहले से ज्यादा विवरण देना पड़ेगा। आयकर ने 24 बिंदुओं वाला प्रोफार्मा भेजा है, जिसमें क्रेता-विक्रेता का खाता, नाम, दोनों की हैसियत, दोनों का पैन नंबर, जन्मतिथि, पिता का नाम, पता, कीमत, स्टांप ड्यूटी के लिए तय मूल्य, स्टांप ड्यूटी, भुगतान की गई नगदी, चेक या डिमांड ड्राफ्ट का विवरण, रजिस्ट्री की तिथि, अचल संपत्ति का ब्योरा, दाखिलकर्ता का नाम, पिता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल आदि पूरा विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नंबर, बुक नंबर और पेज नंबर का भी विवरण भेजा जाएगा।

अभी 30 लाख से ऊपर की संपत्ति थी शामिल

रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आयकर ने सिर्फ 30 लाख रुपये तक की संपत्ति का ब्योरा देना ही अनिवार्य कर रखा था। अब कोई व्यक्ति नोएडा में पांच लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदता है तो उसका विवरण आयकर को भेजा जाएगा।

दरअसल, रजिस्ट्री विभाग को पूरे वित्तीय वर्ष में संपत्तियों की होने वाली रजिस्ट्री का ब्योरा हर साल 30 अगस्त तक भेजना होता है। इसके आधार पर आयकर विभाग छानबीन करता है कि संपत्ति खरीदने के लिए कहीं दो नंबर का पैसा तो नहीं लगा है, जिस पर आयकर न जमा हो। अगर किसी संपत्ति पर शंका होती है उस पर नोटिस जारी कर जवाब मांगता है। जवाब में आय का जरिया भी बताना होता है।

अब श्रमिक कुंज भी होंगे दायरे में
नोएडा में श्रमिक कुंज की कीमत भी पांच लाख से ऊपर है। ऐसे में अब श्रमिक कुंज खरीदने वालों को भी इनकम टैक्स के पूछने पर आय का जरिया बताने की तैयारी कर लेनी चाहिए। ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी और एचआईजी की कीमत तो पहले से ही 30 लाख से ऊपर है।
विज्ञापन

लॉकरों में मिली लिस्ट में नामी बिल्डरों के नाम

यादव सिंह के लॉकरों में 50 से अधिक बिल्डरों के कागजात मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, उसमें मिली बिल्डरों की सूची में मध्यम वर्ग के अलावा कई बड़े नामी बिल्डरों के नाम भी शामिल हैं। इससे इनके कई प्रोजेक्टों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अब इन बिल्डरों को भी जांच का डर सताने लगा है। वहीं, बिल्डरों की हालत यह रही कि जितना पैसा प्राधिकरण के खाते में गया,उतना ही काली कमाई वाले ले गए। इसके अलावा मध्यम वर्ग के कई बिल्डर अभी तक हालत खराब होने के चलते प्रोजेक्ट पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। उधर, प्रदेश सरकार ने बसपा शासन में यादव सिंह के दिए गए ठेकों की रिपोर्ट लखनऊ तलब की है।

सूत्र बताते हैं कि इन प्रोजेक्टों के जरिये यादव सिंह ने अपना ही नहीं बल्कि नाती और पोतों की जिंदगी ऐश से गुजारने तक का जुगाड़ कर दिया था। इन प्रोजेक्टों से कई वर्षों तक रकम आती रहेगी। प्रोजेक्ट एक बार पूरा होने के बाद उससे कई साल तक कमाई होती रहती है। फ्लैटों के बिकने के समय तो कीमत वसूल होती ही है। साथ ही जब भी फ्लैट किसी अन्य को बिकता है तो ट्रांसफर चार्ज के नाम से लाखों रुपये बनते हैं। ऐसे में जब तक फ्लैट हैं, तब तक कमाई होती रहती है। साथ ही किसी भी कार्य के लिए जमा की जाने वाली राशि या समय-समय पर अन्य शुल्कों से भी कमाई का जरिया बना रहता है।

नए बिल्डरों के साथ नहीं की हिस्सेदारी
यादव सिंह ने नए या नौसिखिया बिल्डरों के साथ कभी हिस्सेदारी नहीं की। उन्होंने हमेशा देश के जाने माने बिल्डरों पर विश्वास किया, ताकि भविष्य में उन पर दबाव बनाया जा सके।

फाइल रोकी तो भुगतना पड़ा अंजाम
यादव सिंह द्वारा साइन की गई फाइल को यदि उच्चाधिकारी रोक देते थे तो उन्हें उसका अंजाम भुगतना पड़ता था। रसूख के चलते तीन सीईओ का तबादला काफी समय तक चर्चा में रहा। बताया जा रहा है कि कमाई तो यादव सिंह ने की लेकिन प्राधिकरण में इस दौरान जो भी अधिकारी आया, उसे बदनामी झेलनी पड़ी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें