मेडिकल कॉलेज में मरे पाए बंदरों से कर्मचारियों में दहशत
महामारी की आशंका से घबराए कर्मचारियों ने निदेशक व भाजपा जिलाध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन
एक बच्चा व एक स्टाफ नर्स हुई बीमार, अस्पताल में भर्ती
दिनेश देशवाल
नूंह।
बीते दिन मेडिकल कॉलेज के रिहायशी क्षेत्र में रखी पानी की टंकियों में मृत मिले बंदरों के मामले में बहुत बड़ी लापरवाही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तरफ से बरती जा रही है। अब यहां तैनात स्टाफ व उनके बच्चे भी बीमार होने लगे हैं। संभावित महामारी की आशंका को ध्यान में रखते हुए बृहस्पतिवार को कर्मचारियों ने निदेशक को ज्ञापन सौंपकर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पीड़ित स्टाफ की वैक्सीनेशन कराने की मांग की है। वहीं इस मामले पर कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने सरकार और कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज पहले ही डॉक्टरों की कमी, दवाइयों के अभाव और मशीनों की किल्लत से जूझ रहा है।
अंदर मरे पड़े थे बंदर वही पानी पी रहे थे लोग : मंगलवार को मेडिकल कॉलेज की रिहायशी इमारत के पानी से अचानक बदबू आने व पानी में गले-सड़े अवशेष आने से यहां रहने वाले स्टाफ का माथा ठनका और एस्टेट विभाग के कर्मचारियों को सूचना दी। जिस पर पानी की टंकी चेक की गई तो उसमें एक बंदर मरा हुआ मिला। इसके बाद बुधवार को अन्य टंकियों की जांच में एक अन्य टंकी में भी दो बंदर मृत पाये गए। ये तीनों बंदर कई दिनों के मरे हुए थे तथा इनके शरीर व पानी में कीड़े पड़े हुए थे। इसी पानी को स्टाफ कई दिनों से पीने व अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल कर रहा था।
एक बच्चा व स्टाफ नर्स हुई बीमार:
इस गंदे पानी के लगातार इस्तेमाल का असर यहां रह रहे कर्मचारियों व उनके बच्चों की सेहत पर बृहस्पतिवार को दिखना शुरु हो गया। एक स्टाफ नर्स पवनदीप का बेटा व एक स्टाफ नर्स प्रोमिला स्वास्थ्य दिक्कतों के कारण अस्पताल में भर्ती है। स्टाफ को डर है कि यह एक महामारी के रुप में बड़ी समस्या बन सकती है।
एस्टेट अधिकारी की लापरवाही: निदेशक को दिए गए ज्ञापन पत्र में स्टाफ ने एस्टेट अधिकारी डॉक्टर अनिल पर लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया है। प्रधान संदीप देशवाल, अश्वनी मलिक, सवीन, मोदीश, कविता, बस्करी, राजकुमारी, पवनदीप, संतोष, आसिफ कुलदीप, रुपेश, सतीश, जमशेद वली आदि ने कहा कि इस मामले के बारे में बताया तो बहुत ही लापरवाह रवैये से उसने उल्टा स्टाफ को ही दोषी ठहरा दिया। जबकि उसके पास 10-12 प्लंबर व 2-3 जेई समेत काफी बड़ा सटाफ है। संपदा अधिकारी सरकार से मेवात भत्ता लेते है लेकिन शाम होते ही वे गुरुग्राम रहने के लिए चले जाते है। उन्हें यहां के स्टाफ की परेशानी या समस्याओं से कोई मतलब नहीं होता है।
सभी टंकियों की स्थिति चिंताजनक: स्टाफ ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग न तो टंकियों की नियमित सफाई करवाता है और यदि किसी टंकी का ढक्कन टूट जाए तो उसे सालों साल ठीक नहीं करवाया जाता। मेडिकल कॉलेज में करीब 140 पानी की टंकियां है, जिनमें से अधिकांश में गंदगी के ढेर जमा है।
शिकायत का नहीं है उचित साधन: मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने आरोप लगाया कि स्टाफ को यदि कोई समस्या है तो उसे कालेज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए कोई उचित साधन नहीं है। पहले एक व्हाटसअप ग्रुप बनाया गया था, जिसे संपदा अधिकारी द्वारा बंद कर दिया गया। ऐसे में उनके पास अपनी बात उचित माध्यम से पहुंचाने के लिए दूसरा कोई माध्यम नहीं है।
भाजपा जिलाध्यक्ष को भी साैंपा ज्ञापन: कर्मचारियों ने इन समस्याओं के बारे में बृहस्पतिवार को भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पिंटू को भी ज्ञापन सौंपकर अवगत करवाया। साथ ही इस प्रकार की लापरवाही व हालातों के बारे में सरकार के समक्ष उनका पक्ष रखने की गुहार लगाई।
सभी प्रभावितों का होगा मेडिकल चेकअप:
इस पानी का प्रयोग करने वाले सभी स्टाफ के सदस्यों व उनके परिजनों का मेडिकल चेकअप कराया जाएगा। उसके बाद डाक्टरों की टीम तय करेगी कि आगे प्रभावितों को क्या इलाज दिया जाएगा। कालेज के निदेशक ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं।
मेडिकल काॅलेज के निदेशक डाक्टर मुकेश कुमार ने कहा कि कर्मचारियों ने ज्ञापन दिया है। उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए स्टाफ का मेडिकल चेकअप करने, सभी टंकियों की सफाई व उन्हें दुरुस्त करने, जिस स्तर पर भी लापरवाही बरती गई है उसकी जांच कर दोषी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए है।
विधायक आफताब अहमद ने उठाए सवाल :
नूंह के मेडिकल कॉलेज की पानी की टंकी में तीन मृत बंदर मिलने के मामले पर कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने सरकार और कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना साबित करती है कि मेडिकल कॉलेज में लापरवाही के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। कॉलेज पहले ही डॉक्टरों की कमी, दवाइयों के अभाव और मशीनों की किल्लत से जूझ रहा है। विधायक ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से बना यह मेडिकल कॉलेज क्षेत्र के लिए बड़ी सौगात था, लेकिन अनदेखी के चलते व्यवस्था चरमरा गई है। आफताब अहमद ने कॉलेज की कमियों को दूर करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर वह मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर जल्द मुलाकात करेंगे।