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अनधिकृत कॉलोनियों की डिजिटल मैपिंग पर बोले हरदीप पुरी, काम 31 दिसंबर तक होगा पूरा

Fri, 29 Nov 2019 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री
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दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक दिलाने के लिए सरकार द्वारा पेश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनियों में निवासियों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विधेयक, 2019 बृहस्पतिवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पास हो गया। 
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विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को बताया कि 1731 कॉलोनियों की डिजिटल मैपिंग का काम इस साल 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।

बिल पेश करते हुए पुरी ने कहा, इन कॉलोनियों की डिजिटल मैपिंग का काम 2008 में ही पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ये काम अब शुरू हुआ है और उम्मीद है कि यह इस साल 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। 
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उन्होंने बताया कि एक बार मैपिंग का काम पूरा हो जाए इसका ब्योरा हाल ही में बनाए गए नए पोर्टल पर जारी किया जाएगा। अब तक करीब 600 कॉलोनियों की डिजिटल मैपिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा, यह रहने वालों को मालिकाना हक देने से पहले इन कालोनियों की डिजिटल मैपिंग कराना जरूरी थी।

भाजपा ने दिल्ली की पिछली सरकारों पर साधा निशाना
भाजपा सदस्य रमेश बिधूरी ने अनधिकृत कालोनियों के मुद्दे पर देरी के लिए दिल्ली की पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, इन कालोनियों को नियमित करने के लिए मौजूदा आप सरकार समेत पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने जरूरी पहल नहीं की।

इस पर कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा, भाजपा सांसद नेताओं के नाम लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं जो गलत है। इस पर सदन की कार्यवाही चला रहे ए राजा ने सभी टिप्पणियों को रिकॉर्ड से बाहर रखने का आदेश दिया।
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अनधिकृत कॉलोनी पर आप ने केंद्र को घेरा 

आम आदमी पार्टी (आप) ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के केंद्र सरकार के बिल को लॉलीपॉप करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि कॉलोनियों को पक्का करने का एक प्रस्ताव दिल्ली सरकार ने चार साल पहले ही भेज रखा है। लेकिन आखिरी वक्त तक केंद्र ने इसे दबाए रखा। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केंद्र सरकार दिल्लीवालों को झांसा देने की कोशिश कर रही है।

आप प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि केंद्र सरकार का विधेयक अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के साथ धोखा है। 5 नवंबर 2015 को दिल्ली कैबिनेट ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया था। 12 नवंबर को प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। लेकिन केंद्र सरकार चार सालों तक फाइल दबाए रखी।

चड्ढा का आरोप है कि अब चुनाव से पहले केंद्र सरकार विधेयक को लेकर आई है। इसमें भी केंद्र सरकार की नीयत सही नहीं है। केंद्र सरकार सिर्फ 100 लोगों को ही रजिस्ट्री देने जा रही है। इससे आशंका बन रही है कि आखिर सौ लोग कौन होंगे। क्या भाजपा केवल अपने समर्थकों को रजिस्ट्री देगी? 

राघव चड्ढा ने पूछे केंद्र से सवाल 
. भाजपा ने चार साल पहले दिल्ली सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के बावजूद भी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित क्यों नहीं किया?
. पिछले चाल साल में केंद्र  ने दिल्ली सरकार के सेटेलाइट नक्शे को क्यों स्वीकार नहीं किया? जबकि आज उसी नक्शे को मंजूर किया जा रहा है।
. अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व कन्वेंश डीड किस तरह से कांग्रेस के प्रोविजनल सर्टिफिकेट से अलग है?  
. केंद्र सरकार अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख लोगों में से केवल 100 लोगों को ही रजिस्ट्री क्यों दे रही है?
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