आम आदमी पार्टी (आप) ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के केंद्र सरकार के बिल को लॉलीपॉप करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि कॉलोनियों को पक्का करने का एक प्रस्ताव दिल्ली सरकार ने चार साल पहले ही भेज रखा है। लेकिन आखिरी वक्त तक केंद्र ने इसे दबाए रखा। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केंद्र सरकार दिल्लीवालों को झांसा देने की कोशिश कर रही है।
आप प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि केंद्र सरकार का विधेयक अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के साथ धोखा है। 5 नवंबर 2015 को दिल्ली कैबिनेट ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया था। 12 नवंबर को प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। लेकिन केंद्र सरकार चार सालों तक फाइल दबाए रखी।
चड्ढा का आरोप है कि अब चुनाव से पहले केंद्र सरकार विधेयक को लेकर आई है। इसमें भी केंद्र सरकार की नीयत सही नहीं है। केंद्र सरकार सिर्फ 100 लोगों को ही रजिस्ट्री देने जा रही है। इससे आशंका बन रही है कि आखिर सौ लोग कौन होंगे। क्या भाजपा केवल अपने समर्थकों को रजिस्ट्री देगी?
राघव चड्ढा ने पूछे केंद्र से सवाल
. भाजपा ने चार साल पहले दिल्ली सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के बावजूद भी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित क्यों नहीं किया?
. पिछले चाल साल में केंद्र ने दिल्ली सरकार के सेटेलाइट नक्शे को क्यों स्वीकार नहीं किया? जबकि आज उसी नक्शे को मंजूर किया जा रहा है।
. अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व कन्वेंश डीड किस तरह से कांग्रेस के प्रोविजनल सर्टिफिकेट से अलग है?
. केंद्र सरकार अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख लोगों में से केवल 100 लोगों को ही रजिस्ट्री क्यों दे रही है?