सेक्टर-123 में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच नोएडा प्राधिकरण ने कूड़ा डालने के लिए गड्ढा खुदाई का काम शुरू किया। इसे एक भूमिगत चैंबर का रूप दिया जाएगा। इसी में कूड़े को डाला जाएगा।
यहां से पहले सेक्टर-54 में कूड़ा डाला जा रहा था, जिस पर एनजीटी ने रोक लगा दी थी। हालांकि जब तक सेक्टर-123 में कूड़ा डालना शुरू नहीं होता है तब तक सेक्टर-54 में ही कूड़ा डालने की बात कही जा रही है।
शुक्रवार को प्राधिकरण की टीम कई जेसीबी मशीनों के साथ सेक्टर-123 के साइट पर पहुंची। यहां प्राधिकरण के ओएसडी राजेश सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट महेंद्र कुमार सिंह, प्रोजेक्ट इंजीनियर आरएस यादव सहित प्राधिकरण के अन्य अधिकारी व स्थानीय पुलिस की टीम मौजूद रही।
सुरक्षा के लिहाज से यहां फायर टेंडर सहित कई जरूरी व्यवस्था की गई थी। खुदाई के दौरान धूल न उड़े, प्राधिकरण द्वारा पानी का छिड़काव भी साथ-साथ किया गया। यहां 120 मीटर लंबे, 75 मीटर चौड़े और 5 मीटर गहरा गड्ढा बनाया जा रहा है।
गड्ढा खुदाई का काम करीब पांच दिन तक चलेगा। इसके बाद यहां गड्ढे में कूड़ा डालने का काम शुरू होगा। बताया जा रहा है कि यहां कूड़े के रेमिडिएशन के लिए मशीन भी लगाई जाएगी ताकि इससे आरडीएफ तैयार की जा सके।
यही नहीं यहां कचरा विभाजन की भी योजना है ताकि इससे इलाके में दुर्गंध न फैले। जब सेक्टर-123 में कचरा फेंकना शुरू हो जाएगा तब दूसरी जगहों का कूड़ा भी वहां से हटा दिया जाएगा। यही नहीं सेक्टर-54, 137 व अन्य स्थानों पर सफाई के बाद उसे संवारने का काम भी होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां लैंडफिल साइट और वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए एनजीटी ने आदेश दिया था। यही नहीं इसको बनाने के दौरान कई तरह की विधियां अपनाई जानी थी ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
संघर्ष समिति के नेता रघुराज सिंह का कहना है कि यहां केवल कूड़ा डालने की तैयारी है और किसी तरह की सावधानी नहीं बरती जा रही है। यहां चारो ओर हरियाली विकसित करने की योजना थी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आगे बरसात का मौसम आने वाला है। लिहाजा बीमारी फैलने का भी खतरा मंडरा रहा है। यही वजह है कि अब हमें दोबारा एनजीटी जाना होगा। यहां पर डंपिंग ग्राउंड नहीं बनना चाहिए।