डीजल गाड़ियों की खरीद पर है रोक
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नगर निगम में हुए डीजल घोटाले की जांच में दोषी पाए जाने पर बर्खास्त किए गए ठेके पर रखे गए चार ड्राइवरों के खिलाफ सोमवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसमें अब निगम के अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे।
वहीं, शिकायतकर्ता रवींद्र चावला का कहना है कि निगम अधिकारियों ने ठेके पर रखे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर असली गुनाहगारों को बचाने का काम किया है। 24 मई 2015 को अमर उजाला ने नगर निगम के वाहनों से डीजल चोरी कर बेचने के एक मामले का भंडाफोड़ किया था।
निगम कर्मचारियों द्वारा डीजल चोरी का यह धंधा वर्षों से जारी था। निगम कर्मचारी निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाते रहे और अधिकारियों ने आंख बंद कर रखी थीं। आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र चावला ने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की जांच कराने की मांग की। जांच के बाद निगम अधिकारियों ने ठेके पर लगे चार ड्राइवरों संतोष कुमार, राजकुमार, अखिलेश और संदीप कुमार को दोषी पाया।
चार दिन पहले निगमायुक्त सोनल गोयल ने उक्त कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चारों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। वाहन सेल के एक्सईएन राम प्रकाश ने बताया कि चारों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कोतवाली पुलिस को शिकायत दी थी। सोमवार को चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।