दिल्ली-एनसीआर में डीजल कैब पर बैन से साइबर सिटी का बीपीओ सेक्टर बैकफुट पर आ गया है। बीपीओ में काम करने वालों की आवाजाही का सबसे बड़ा माध्यम कैब है। यहां चलने वाली करीब 30 हजार कैब में 65 फीसदी डीजल इंजन वाली हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीजल कैब के पहिए पूरी तरह से थम गए हैं। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद से आने-जाने वाले बीपीओ कर्मचारियों को अपने कार्यालय और फिर घर तक पहुंचने का संकट खड़ा हो गया है।
सबसे अधिक परेशानी तो नाइट शिफ्ट वालों को होने लगी है। रात की शिफ्ट में करीब 20 हजार महिलाएं गुडग़ांव के बीपीओ में काम करती हैं। उन्हें घर छोडने में दिक्कत आने लगी है। डीजल कैब पर बैन बीपीओ सेक्टर के लिए एक और बड़ी मुसीबत है। इस सेक्टर के जानकारों का कहना है कि बीपीओ कंपनियों को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें।