कई वर्ष पहले बनी लाइसेंसशुदा कॉलोनियों सुशांत लोक, डीएलएफ व पालम विहार को नगर निगम को हस्तांतरित न किए जाने का खामियाजा राज्य सरकार को राजस्व के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ा। करीब 100 करोड़ से भी अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स नगर निगम के खाते में जमा नहीं हो सका।
माना जा रहा है कि इसी नुकसान के मद्देनजर सरकार ने एक लाख परिवारों वाली इन कॉलोनियों को अब नगर निगम को हस्तांतरित करने में दिलचस्पी दिखाई है। इसका निगम को तो फायदा मिलेगा ही, साथ ही यहां रहने वाले परिवारों को भी अब बिल्डरों के मुकाबले निगम को सालाना कम टैक्स देना होगा।
प्रदेश सरकार की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने के लिए छूट दी गई थी। वहीं नगर निगम ने भी बकाया प्रॉपर्टी टैक्स को अधिक से अधिक जमा करवाने के प्रयास किए थे।
2008 में नगर निगम अस्तित्व में आने के बाद से निगम ने भी इन लाइसेंसशुदा कॉलोनियों, पालम विहार, सुशांत लोक (फेज-1) तथा डीएलएफ (फेज- 1 से 3) के निवासियों से प्रॉपर्टी टैक्स लेने के लिए सूची तैयार की थी, लेकिन बिल्डर द्वारा पहले से ही टैक्स लिए जाने के कारण यहां के निवासियों ने नगर निगम को टैक्स देने से साफ इनकार कर दिया था और डबल टैक्स का मामला हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से डाला हुआ था।
गुड़गांव सिटीजन काउंसिल (जीसीसी) की मानें तो इन कॉलोनियों पर नगर निगम की ओर से 2008 से अब तक का करीब 100 करोड़ से भी अधिक का टैक्स लगाया हुआ था, लेकिन काउंसिल की ओर से याचिका दायर किए जाने और टैक्स जमा न करने के कारण नगर निगम को करोड़ों का टैक्स नहीं मिल सका, क्योंकि यहां से टैक्स की वसूली कॉलोनियां बनाने वाले बिल्डर कर रहे थे।
जीसीसी के अनुसार, इसी नुकसान के दबाव में ही सरकार ने गुड़गांव के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए इन कॉलोनियों के रखरखाव के लिए इन्हें नगर निगम को हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की है।
पालम विहार और सुशांत लोक (फेज-1) का विकास अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर तथा डीएलएफ (फेज-1 से 3) का विकास डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड द्वारा किया जा रहा था।
बिल्डरों की ओर से अधिकतम 3.40 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति महीना मेंटेनेंस चार्ज के रूप में यहां के निवासियों से लिया जा रहा था, लेकिन अब नगर निगम द्वारा छोटे-बड़े 5 से 10 रुपये प्रति वर्ग गज सालाना लिया जाएगा, जो कि प्रतिमाह 0.83 पैसे प्रति वर्ग गज बैठता है। निगम को हस्तांतरित होने से निवासियों को प्रतिमाह कम टैक्स देना होगा, वहीं निगम को यह फायदा होगा कि उसे अप्रैल 2016 से प्रॉपर्टी टैक्स भी मिलना शुरू हो जाएगा।