ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके में डायरिया की चपेट में आने से रबूपुरा क्षेत्र के बीरमपुर गांव में एक बच्ची की मौत हो गई जबकि करीब 250 बच्चे बीमार हो गए। हालांकि प्रशासन ने मात्र 25 बच्चों के बीमार होने की ही पुष्टि की है। डायरिया फैलने से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और बीमारी से बचने के लिए ग्रामीणों का पलायन शुरू हो गया।
बीमार बच्चों को जेवर, बुलंदशहर, गाजियाबाद के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। यहां कई बच्चों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। डायरिया फैलने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया है। आला अधिकारियों एवं डॉक्टरों की टीम गांव पहुंच चुकी है। डीएम एवी राजामौली और सीएमओ आरके गर्ग ने गांव का भ्रमण कर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की।
प्रशासन और डाक्टरों की टीम ने गांव में डाला डेरा
जानकारी के मुताबिक बीते 14 अगस्त की रात गांव के कुछ बच्चों को उल्टी-दस्त, ठंड लगने और हाथ-पांव में टेढ़ापन होने जैसे लक्षण दिखने शुरू हो गए। 15 अगस्त को भी बच्चों के बीमार होने का सिलसिला जारी रहा। इस बात की जानकारी ग्राम प्रधान के पति बाबू खां ने एसडीएम जेवर को दी। लेकिन मौके पर कोई चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल पाई।
इस दौरान और भी कई बच्चे बीमार हो गए और एक ग्रामीण राजेश की पांच वर्षीय बेटी तानिया ने दम तोड़ दिया। 16 अगस्त की सुबह अचानक डायरिया ने लगभग 225 बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद फिर प्रधानपति द्वारा प्रशासन को महामारी की सूचना दी गई तो मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम जेवर सतीश चंद्र शुक्ल अपने साथ डॉक्टरों की टीम लेकर गांव पहुंचे।
क्यों फैली है ये बीमारी?
टीम में शामिल एसीएमओ डॉ. वीके सिंह, डीसीएमओ डॉ. सुनील दोहरे, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी जेवर डॉ. मनोज कुमार, मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रवेश ने गांव में कैंप लगाकर बच्चों का इलाज शुरू कर दिया है। कुछ पीड़ित बच्चों का गाजियाबाद, बुलंदशहर, जेवर और झाझर आदि स्थानों के अस्पतालों में भी इलाज चल रहा है।
एसीएमओ डॉ. वीके सिंह का कहना है कि गांव में गंदगी फैली हुई है और काफी संख्या में मक्खियां हैं। रात को बच्चे बिना हाथ धोए खाना खाए होंगे, जिसके चलते वे डायरिया की चपेट में आ गए। डॉ. सिंह ने कुछ हद तक मौसम में आए परिवर्तन को भी डायरिया फैलने के लिए जिम्मेवार ठहराया है।