नई दिल्ली। बायोफार्मासुटिकल कंपनी एबवी ने विश्व रेटिना दिवस पर इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में डायबिटिक मैकुलर एडिमा (डीएमई) के बढ़ते बोझ पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डीएमई, मधुमेह के कारण दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण है। इस कारण भारत में 30 लाख लोग प्रभावित है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक 14 में से 1 डायबिटिक व्यक्ति डीएमई से पीड़ित है। भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 2045 तक 13.42 करोड़ तक पहुंच सकती है जिससे दृष्टिहीनता का खतरा बढ़ेगा। विशेषज्ञों ने रेटिना स्क्रीनिंग को राष्ट्रीय मधुमेह कार्यक्रमों में शामिल करने, टियर-2 और टियर-3 शहरों में विशेषज्ञों की उपलब्धता और जागरूकता बढ़ाने की मांग की। एबवी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश पट्टाथिल ने कहा कि कंपनी डीएमई से पीड़ित लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम कर रही है। कार्यक्रम में डॉ. ललित वर्मा, डॉ. महिपाल सचदेव, डॉ. आर किम डॉ. एमआर डोगरा, डॉ. चैत्रा जयदेव और डॉ. शशांक जोशी ने डीएमई के प्रबंधन पर विचार-विमर्श किया। ब्यूरो