नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने ट्रैफिक चालान के निपटारे को लेकर केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में किए गए हालिया संशोधनों पर गहरी चिंता जताई है और इस पर विरोध जताया। बुधवार को पारित एक प्रस्ताव में एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने संबंधित अधिकारियों से इन बदलावों पर पुनर्विचार करने की मांग की। समिति ने जोर दिया कि विवादित ट्रैफिक चालानों पर प्रभावी, स्वतंत्र और सुलभ न्यायिक जांच बनी रहनी चाहिए।बार एसोसिएशन ने उन परिवर्तनों का विरोध किया, जिनके तहत अब विवादित चालानों का प्रारंभिक निपटारा स्वतंत्र न्यायिक मंच के बजाय कार्यकारी या विभागीय अधिकारियों द्वारा किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रस्ताव में कहा कि चालान से संबंधित तथ्यों, साक्ष्यों और दायित्व के विवादित प्रश्नों का निपटारा केवल स्वतंत्र न्यायिक मंच द्वारा ही होना चाहिए। डीएचसीबीए ने सक्षम अदालत में जाने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत पूर्व जमा करने की शर्त पर भी आपत्ति जताई। एसोसिएशन के अनुसार, यह शर्त आम नागरिकों के लिए न्यायिक उपचार तक पहुंच में बड़ा वित्तीय बाधा बनती है। इसके अलावा, बार बॉडी ने उस प्रावधान का भी विरोध किया, जिसके तहत 45 दिनों के भीतर चालान का विरोध न करने पर उसे स्वतः स्वीकार माना जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि यह व्यवस्था अनुचित है और डिजिटल पहुंच की समस्या या जटिल ऑनलाइन प्रक्रियाओं को समझने में कठिनाई का सामना करने वाले व्यक्तियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगी।
प्रस्ताव में कहा गया, कार्यकारी समिति त्वरित ट्रैफिक प्रवर्तन की आवश्यकता को स्वीकार करती है, लेकिन यह निष्पक्ष न्यायनिर्णयन और न्याय तक सार्थक पहुंच की कीमत पर नहीं हो सकता। यह प्रस्ताव डीएचसीबीए अध्यक्ष एन. हरिहरन और सचिव विक्रम सिंह पंवार द्वारा हस्ताक्षरित है।