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धौला कुआं गैंगरेपः जिरह पूरी, फैसला दो दिन बाद

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रेप या गैंगरेप से पीड़ित युवती के दिमाग, शरीर व मन पर हमेशा दाग रहता है और वह पूरी जिंदगी इस प्रकार की घटना को नहीं भूला सकती। रेप से पीड़िता का मान-सम्मन दांव पर लग जाता है और सदमे में रहती है।
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गैंगरेप एक जघन्य व गंभीर आपराध है ऐसे मामलों में लिप्त आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी जरूरी है। धौला कुआं गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा की मांग करते हुए सरकारी वकील ने अदालत के समक्ष उक्त तर्क रखे।

वहीं बचाव पक्ष ने सहानुभरूत भी अपील की। द्वारका स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेन्द्र भट्ट ने सरकारी वकील व बचाव पक्ष के सजा निर्धारण को लेकर जिरह के दौरान वकीलों के तर्क सुनने के बाद कहा कि वे दोषियों की सजा निर्धारण पर अपना फैसला सोमवार को देंगे।
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सरकारी पक्ष के तर्क

इससे पूर्व अदालत के समक्ष पेश सरकारी वकील सतविन्द्र कौर ने मामले में पांच दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिन प्रति दिन रेप व गैंगरेप के मामलों में वृद्धि हो रही है। इस प्रकार के अपराध का असर समाज के साथ-साथ पीड़िता पर पूरी जिंदगी रहता है।

उन्होंने कहा कि मामले में पीड़िता युवती के दिमाग, मन व शरीर पर कभी न भरने वाला दाग रह गया है। उसका मान-सम्मन दाव पर है। उन्होंने सर्वोच्च व हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह जघन्य व गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में लिप्त दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

हालांकि ऐसे अपराध के लिए मौत की सजा दी जानी चाहिए लेकिन कानून में इस अपराध के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान है और इन सभी को अधिकतम यानि आजीवन कारावास की सजा दी जाए।

उन्होंने कहा कि पीड़ित युवती गुड़गांव में नौकरी करती थी और उसकी नौकरी छूट गई। वह अपने घर जाने में लिए मजबूर हो गई और घटना के बाद से ही सदमे में है। ऐसे में उसे उचित मुआवजा भी प्रदान करने का निर्देश दिया जाए। यह राशि दोषियों से वसूली जाए।

उन्होंने बचाव पक्ष के उस तर्क पर आपत्ति जताई कि उनके मुवक्किलों से सहानुभूति बरती जाए। उन्होंने कहा सभी आपराधिक प्रवृत्ति के है और उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। इनमें से कमरूद्दीन, उस्मान व कुछ अन्य पर फरीदाबाद थाने में आपराधिक मामला दर्ज था जिसमें सजा हुई है।

इसी प्रकार बल्लभगढ़ के सदर थाने में भी गैंगरेप का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा परिवारिक जिम्मेदारी के आधार पर भी सहानुभूति न बरती जाए क्योंकि परिवारिक जिम्मेदारी सभी की होती है और दोषियों को अपराध से पहले सोचना चाहिए था कि उसका नतीजा क्या होगा।

बचाव पक्ष के तर्क

फरीदाबाद निवासी शमशाद उर्फ खुटकन, इकबाल उर्फ छोटी बिल्ली, शाहिद उर्फ बड़ी बिल्ली, कमरूद्दीन उर्फ कमरू उर्फ मोबाइल के अधिवक्ता अब्दुल सलाम ने कहा कि उनकेमुवक्किल घटना के बाद से ही जेल में है और काफी गरीब परिवार से है।

उन्होंने कहा कि घटना के बाद शमशाद व कमरूद्दीन के पिता का सदमे में देहांत हो गया। वहीं दोनों के क्रमश: दो व तीन बच्चें है। इसके अलावा इकबाल व शाहिद के भी दो-दो बच्चे है। उनके सभी मुवक्किल काफी कम आयु के है और उनपर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों के पिछले चार वर्ष से जेल में होने के कारण सभी का परिवार भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में उनके मुवक्किलों से सहानुभूति बरतते हुए उनको जेल में काटी गई सजा के आधार पर छोड़ा जाए।

'उस्मान घटना के समय था अस्पताल में'

दोषी उस्मान उर्फ काले की ओर से पेश हुए न्याय मित्र अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव ने कहा कि उनकेमुवक्किल की दो नाबालिग पुत्रियां व एक नाबालिग पुत्र है। वहीं, विकलांग भाई इस्लाम है। पूरा परिवार उस्मान की आय पर निर्भर था। इसके अलावा घटना के समय वह अस्पताल में था क्योंकि उसकी पत्नी ने उस दिन पुत्री को जन्म दिया था। उन्होंने इस बात की जानकारी उसे हाल ही में मिली है अत: उनके मुवक्किल से सहानुभूति बरतते हुए कम से कम सजा प्रदान की जाए।

कुछ तर्क हाईकोर्ट के लिए भी रख लो: अदालत
बचाव पक्ष ने जिरह के दौरान आज फिर कहा कि उनकेमुवक्किल निर्दोष है और उनको फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा कि वे पांचों को दोषी ठहरा चुके है ऐसे में उक्त तर्क अब हाईकोर्ट के लिए रख लो।

जेल में काटी गई सजा पर रिहाई नहीं: अदालत
अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को भी नकार दिया कि जेल में काटी गई सजा के आधार पर उनके मुवक्किलों को रिहा किया जाए। अदालत ने कहा कि इस अपराध में न्यूनतम सजा 10 वर्ष है और दोषी मात्र चार वर्ष से जेल में ंहै। ऐसे में उनको कैसे छोड़ा जा सकता है।

दोषियों का परिवार बच्चों के साथ पहुंचा जज के समक्ष
सरकारी व बचाव पक्ष की जिरह खत्म होते ही दोषियों के परिवार के लोग रोते-पीटते न्यायाधीश के कमरे में पहुंच गए। दोषियों की पत्नियां छोटे-छोटे बच्चों के साथ अदालत से रहम की दुहाई देने में लगी रही। उन्होंने कहा कि जज साहब हमारा कोई नहीं है। हम इनके ही सहारे है हम पर रहम कर इनको छोड़ दो। आखिर अदालत ने कहा वे अपना फैसले सोमवार को देंगे आप घर जाओ। पुलिसकर्मियों ने काफी प्रयास से सभी को अदालत से बाहर निकाला।

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क्या है धौला कुआं मामला

पेश मामला कन्वर्जिस बीपीओ की सीनियर एक्जीक्यूटिव से सामूहिक दुष्कर्म का है। नार्थ ईस्ट निवासी पीड़िता 23 व 24 नवंबर 2010 की रात करीब डेढ़ बजे मोतीबाग इलाके में कॉल सेंटर की कैब से घर लौटी थी।

उस समय पीड़िता व उसकी सहकर्मी अपने घर की ओर बढ़ रही थीं। उसी समय महिंद्रा पिक अप में दोषी आए और बंदूक की नोंक पर पीड़िता को अगवा कर लिया। बदमाशों ने पीड़िता से रास्ते और मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में ले जाकर भी रेप किया था। इसके बाद बदमाश पीड़िता को वहीं फेंक कर फरार हो गए थे।

पुलिस ने इस मामले में दो दिसंबर 2010 को खास सूचना के आधार पर फरीदाबाद गांव धौज इलाके से मीरपुर पलवल निवासी उस्मान उर्फ काले व बिल्ला कॉलोनी सेक्टर 55 फरीदाबाद निवासी शमशाद को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अन्य आरोपियों बिल्ला कॉलोनी फरीदाबाद के ही निवासी


इकबाल उर्फ छोटी बिल्ली, शाहिद उर्फ बड़ी बिल्ली व कमरूद्दीन उर्फ कमरू उर्फ मोबाइल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अदालत ने 14 अक्तूबर को दिए फैसले में पांचों को दोषी ठहरा दिया था।


सुबह से कोर्ट में जुटे थे परिजन
धौला कुआं गैंगरेप मामले की सुनवाई के लिए दोषियों के परिजन सुबह से कोर्ट पहुंच गए। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने उनके परिजनों को झूठे मामले में फंसाया है। सजा पर जिरह के बाद पुलिस पर दोषियों को हवालात लेकर जाने लगी तो परिजन रोते हुए उनके पीछे भागने लगे।

दोषी उस्मान की पत्नी अपनी तीन साल की बेटी को लेकर कोर्ट में पहुंची। उसने कहा कि उसके पति को पुलिस ने झूठा फंसाया गया है। चार सालों से मुकदमा लड़ रहे हैं, परिवार की हालत बेहद खराब हो चुकी है और खाने के भी लाले पड़े हैं। उस्मान ही परिवार में कमाने वाला है और वह जेल चला जाएगा तो हमारे परिवार का क्या होगा।

उस्मान के गांव मीरपुर जिला पलवल से आए उसके पड़ोसी जकारिया खान का कहना है कि इस घटना के दिन उस्मान की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया और वह उस दिन अस्पताल में था। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से ही सभी दोषी जेल में हैं और किसी को भी जमानत नहीं मिली है।
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