फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आस्ट्रेलिया से महंगा पैकेज छोड़ बने गांव के सरपंच

विज्ञापन
विज्ञापन
पलवल। कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति कुछ ठान ले तो सारी कायनात उसकी मदद करने को सामने आ जाती है। गांव दुर्गापुर के नवनिर्वाचित सरपंच धर्मेंद्र तेवतिया ने जब देश व विदेश में महंगे पैकेज की नौकरी छोड़ कर सेवा के रास्ते को चुना तो सारे रास्ते खुद-ब-खुद खुलते चले गए।
विज्ञापन


वह उस गांव में 85 फीसदी से भी अधिक वोट लेकर सरपंच चुने गए, जहां उनके गोत्र और परिवार के मात्र पांच वोट हैं। गांव दुर्गापुर के नव निर्वाचित सरपंच धर्मेंद्र तेवतिया का पैतृक गांव कौंड़ल है।

गांव दुर्गापुर में उनकी ननिहाल है तथा वे ननिहाल के गांव में ही रहते हैं। 35 वर्षीय धर्मेंद्र ने स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2004 में जीवा विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की।
विज्ञापन


उसके बाद वर्ष 2010 में आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में रहते हुए एमबीए की डिग्री ली। एमबीए करते ही उन्हें देश व विदेश में नौकरी के बडे़ पैकेज मिलने लगे, लेकिन धर्मेंद्र के अनुसार वे अपने क्षेत्र में आकर जरूरतमंदों की सहायता व सेवा करना चाहते थे।
विज्ञापन

बार अध्यक्ष बनने के बाद छोड़ा पेशा

इसी सोच के साथ उन्होंने जिला अदालत में वकालत शुरू कर दी। सेवा के कार्यों को देखते हुए ही वह 2013-14 में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुन लिए गए। बार के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने बार के लिए चैंबर बनवाने सहित कई महत्वपूर्ण कार्य किए।

10 जनवरी को पहले चरण में हुए पंचायत चुनाव में गांव के लोगों ने उन्हें दुर्गापुर से सरपंच पद के लिए मैदान में उतार दिया। पंचायती चुनाव में जहां एक-एक वोट का हिसाब लगाया जाता है, ऐसे में पाल गोत्र व परिवार की मात्र पांच वोट होने के बावजूद उन्होंने सर्वाधिक मतों से जीत हासिल की।

धर्मेंद्र को 1544 वोटों में से कुल 1262 वोट मिले, यानि मतदान का 85 प्रतिशत। वे एक हजार से अधिक के अंतर से सरपंच चुने गए। गांव का सरदार बनने के बाद धर्मेंद्र तेवतिया का कहना है कि उन्होंने गांव की समस्याओं का खाका तैयार कर लिया है तथा पद ग्रहण करते ही उन्हें अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें