भदान (फिरोजाबाद) से खुर्जा (बुलंदशहर) तक डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के 200 किमी ट्रैक पर शुक्रवार को मालगाड़ी चलाकर सफल ट्रायल किया गया। जनवरी में भदान से भाऊपुर (कानपुर) तक 143 किमी तक के ट्रैक पर मालगाड़ी चलने लगेंगी।
इससे कानपुर से नई दिल्ली के बीच माल लाने और ले जाने में व्यापारियों को आसानी होगी। समय से माल पहुंचेगा और इसके दाम भी कम होने से व्यापारियों को भी आसानी होगी। यूं भी सड़क मार्ग से माल ढुलाई का भाड़ा रेल मार्ग की तुलना काफी अधिक है।
मालगाड़ी गलियारा (डीएफसी) पर अलग से ट्रेनें चलने से दिल्ली-कानपुर का मुख्य रेलमार्ग पर ट्रैफिक लोड कम हो जाएगा। भाऊपुर से पनकी के रास्ते मालगाड़ियां कानपुर से नई दिल्ली के बीच संचालित होंगी। कानपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब से सीधे जुड़ेगा। डीएफसी का पहला चरण ईस्टर्न डीएफसी करा रही है। खुर्जा से यह ट्रैक आगे पंजाब गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चीनी, पंजाब से गेहूं समेत दूसरे अनाज को लाने और ले जाने पर लॉजिस्टिक कॉस्ट में कमी आएगी। अभी 60 फीसदी ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, डीएफसी की वजह से मालगाड़ियों से कानपुर का व्यापार पंजाब, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ेगा। अभी मालगाड़ियों की देरी की वजह से दूसरे प्रदेशों से आने वाली सब्जियां सड़ जाती हैं।
डीएफसी से आने वाली मालगाड़ियां कानपुर जल्दी पहुंचेंगी। अभी मालगाड़यों की औसत अधिकतम स्पीड 75 किमी प्रति घंटा है लेकिन डीएफसी पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें आसानी से चल सकेंगी।