दिल्ली में तीसरे सीरो सर्वे के परिणामों के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि चौथा सर्वे करने से पहले संक्रमण की स्थिति का सही तरीके से आंकलन करने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में एंटीबॉडी का स्तर और भी घटेगा। ऐसी स्थिति में अगला सर्वे करने का कोई खास लाभ नहीं है।
सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर जुगल किशोर का कहना हैं कि सीरो सर्वे संक्रमण के विस्तार का पता लगाने के लिए किया जाता है, जब संक्रमण शुरू होता है तब ऐसे सर्वे से लाभ मिलता है। तीसरे सीरो सर्वे ने इस बात का संकेत दे दिया है कि इसका बहुत ज्यादा फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब होने वाले सीरो सर्वे से संक्रमण के विस्तार की सही स्थिति नहीं पता चल सकेगी। क्योकि एंटीबॉडी ज्यादा समय तक नहीं टिक रही है।
अपोलो अस्पताल के डॉ यश गुलाटी ने कहा की दिल्ली में 40 से 50 फ़ीसदी लोग संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं, हालांकि, इन सभी लोगों में इस समय एंटीबॉडी नहीं होंगे। क्योंकि यह 2 से 3 महीने के भीतर ही खत्म हो रहे हैं। ऐसे में अगले सर्वे में एंटीबॉडी मिलने का स्तर और भी घट सकता है। इस स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि सीरो सर्वे को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि तीसरे सर्वे के परिणामों पर अध्ययन किया जा रहा है। इस मामले में न्यायालय से जो दिशा- निर्देश मिलेंगे उस हिसाब से काम किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने बुधवार को उच्च न्यायालय में सीरो सर्वे के तीसरे चरण चरण के परिणाम की रिपोर्ट सौंपी थी जिसके मुताबिक दिल्ली में 25 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी मिली है जो अगस्त में किए गए सर्वे से 4 फ़ीसदी कम है।