कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के घोषणा किए जाने व कुछ समय पहले उपायुक्त द्वारा मौके का जायजा लिए जाने के बाद भी उलेटा माइनर पर कोई काम शुरू न होने से किसानों में मायूसी है।
गेहूं की फसल की बिजाई करने के लिए किसान क्या करें, यह उनके सामने एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है। क्योंकि इस माइनर से लगे करीब डेढ़ दर्जन गांवों की सिंचाई के लिए नहर का पानी व बरसात के अलावा दूसरा कोई साधन नहीं है।
बता दें कि इस माइनर पर उलेटा, हसनपुर, खेडली दौसा, इंडरी, खेडा-खलीलपुर, दूबालू, गांगोली सहित करीब एक दर्जन गांवों की हजारों एकड़ भूमि खेती के लिए आश्रित है। इन गांवों की जमीन में भूजल या तो खारा है या फिर है ही नहीं।
माइनर से नहीं मिला लाभ-
माइनर का निर्माण करीब 15 वर्ष पहले किया गया था। लेकिन इसे मुहाने से नीचा और टेल से ऊंचा कर दिया गया, जिस कारण इसका लोगों को कोई लाभ नहीं मिला। हालात ये रहे कि हमेशा बंद रहने के कारण यह माइनर कई स्थानों से अपना अस्तित्व भी खो चुकी है। किसानों की मांग है कि इस माइनर को खोद कर नीचा किया जाए और इसे उजीना ड्रेन में मिलाया जाए।
लोगों ने किए प्रयास-
उलेटा माइनर को नीचा कराने के लिए बल्ला खटाना, नत्थूराम गुर्जर, जगदेव शास्त्री दूबालू, भजनलाल गांगोली, तोताराम, गोपाल छपैडा, हुकम पंच, जयराम सरपंच, किसन, हरकेश, लक्ष्मण, निर्भय सरपंच, अंतराम खटाना, अयुब सरपंच सहित हर गांव के लोगों ने प्रशासन से लेकर मंत्री तक हाजिरी लगाई कोई कार्रवाई नहीं हुई।
घोषणा पर नहीं अमल-
फरवरी माह में किरा गांव में आए कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के सामने करीब 20 गांवों के लोगों ने संयुक्त मांग रखी कि उलेटा माइनर को नीचा किया जाए। इस पर मंत्री ने जल्द कार्य शुरू करने की घोषणा की, लेकिन 8 माह बीत जाने के बाद भी स्थिति वही है। इसके अलावा स्थानीय भाजपा नेता संजय सिंह व बल्ला खटाना के नेतृत्व में सांसद एवं केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, चंडीगढ़ में कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के अलावा विभागीय अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं।
क्या है स्थिति-
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता डीएन बंसल ने बताया कि उलेटा माइनर का प्रोजेक्ट तैयार कर काफी समय पहले भेज दिया गया था। अब फाइल कहां हैं उन्हें इस बारे में मालूम नहीं हैं।