नोटबंदी की घोषणा के बाद से ही ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में कैश की भारी कमी हो गई है। आलम ये है कि जिस बैंक के पास पहले 50 लाख रुपये प्रति दिन आते थे। उन बैंकों को पांच लाख रुपये में काम चलाना पड़ रहा है।
गांव से दूरी तय कर बैंक पहुंचना और सैंकड़ों लोगों की कतार में खड़ा होकर राशि का आदान-प्रदान करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। दूसरी ओर ग्राहकों की भारी भीड़ तथा कई बैंकों द्वारा राशि मुहैया नहीं कराए जाने से हंगामे की स्थिति उत्पन्न होने लगी है।
बता दें फरीदाबाद ग्रामीण में सिंडिकेंट बैंक, स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, आईडीबीआई, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की लगभगत 50 शाखाएं है। इन शाखाओं में कैश नहीं पहुंच पा रहा है। शुरूआत में बैंकों को आठ करोड़ की करेंसी मिली। लेकिन, इसके बाद लगातार कैश में कमी आ रही है। आलम ये है कि फिलहाल 10 फीसद कैश ही बैंक पहुंच पा रहा है। ग्रामीण बैंक को मानक के अनुरूप कैश न मिलने से समस्या जटिल होती जा रही है।
अज्ञात लोगों ने काटी बिजली की लाइन
कैश न मिलने से नाराज कुछ अज्ञात लोगों ने चंदावली स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की बिजली की लाइन काट दी, सीसीटीवी कैमरा और फ्लैक्स बोर्ड फाड़ दिए। जिसके कारण सोमवार को बैंक में कैश का लेन-देन कार्य प्रभावित रहा। शाखा प्रबंधक सुनीता लूथरा ने इसकी शिकायत आईएमटी चौकी में दर्ज कराई। जिसके बाद तकनीकी कर्मचारियों द्वारा बिजली ठीक कराई गई और दोबारा काम शुरू हो पाया।
पैसा न होने से काम बंद
मैं 8 दिन से लगातार बैंक आ रहा हूं। पैसा न होने के कारण मंदिर का काम भी बंद हो गया। लेबर, मिस्त्री ने बिना पैसा काम करने से मना कर दिया। वे पुराने नोट लेने से मना करते है।-खिल्लू धनखड़, गांव मच्छगर
तीन दिन से भटक रहा हूं
दयालपुर स्थित सिंडिकेंट बैंक में तीन दिन से कैश नहीं है। आज इसलिए चंदावली बैंक आया। लेकिन यहां भी दिक्कत है। घर में एक रुपया भी नहीं है।-हरकेश भोला, गांव दयालपुर
खाली हाथ लौटा रहे
सर्दी के लिए बच्चों की यूनिफॉर्म खरीदनी है और खेती के लिए खरीदे गए ट्रैक्टर की किस्त देनी है। एजेंसी पुराने नोट नहीं ले रही। तीन दिन से बैंक आ रही हूं। कैश नहीं होने से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।-गीता, गांव अटाली
घर में खाने का सामान खत्म
मेरा लड़का बाहर रहता है। घर में साग-सब्जी के लिए खुले पैसे नहीं हैं। इसलिए बैंक आना पड़ रहा है लेकिन कैश नहीं है। अब घर में खानेपीने का सामन भी खत्म हो चुका है। बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।-तेजपाल कौर, गांव बुखारपुर
काम बंद होने की नौबत
ट्रैक्टर चलाने वाली लेबर को पैसा देना है। इसलिए तीन दिन से बैंक आ रही हूं। पैसा नहीं मिला तो काम बंद हो जाएगा। कई गांवों के बैंकों के चक्कर लगा लिए लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।-जगवती, गांव मच्छगर
सरकार के दावे खोखले
खेतों में बुवाई का समय चल रहा है। बीज एजेंसी वाले पुराने नोट लेने से मना कर रहे हैं। पैसा नहीं मिला तो फसल पिछाई हो जाएगी। सरकार किसानों को राहत देने के दावे तो कर रही है लेकिन हकीकत में कुछ नहीं हो रहा।-रामकरण, गांव गढ़खेडा