मलाई गांव के निवासी नसीम द्वारा मोबाइल पर दिए गए तलाक के मामले में दिल्ली की फतेहपुरी मस्जिद एवं देवबंद स्थित दारूल-उल-उलूम स्थित इस्लामी संस्थाओं ने फतवा जारी कर दिया है। यह फतवा पति नसीम अहमद की याचिका पर दिया गया है।
फतवे में कहा गया है कि इस्लामी शरीयत कानून के तहत तलाक के समय औरत का हाजिर होना जरूरी नहीं है। यदि मर्द ने होश-हवास के साथ तलाक दे दिया तो वह तलाक ही माना जाएगा।
इसके बाद औरत पति के लिए परायी हो गई तथा बिना हलाला के पति के निकाह में नहीं आ सकती। इस फतवे पर दिल्ली की फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती डॉक्टर मुकर्रम ने हस्ताक्षर किए हैं और दूसरे फतवे पर देवबंद के कई आलिमों के हस्ताक्षर हैं।
नसीम का निकाह 15 मई 2011 को राजस्थान के अलवर जिला अंतर्गत चेलाकी चौपानकी गांव निवासी असमीना के साथ हुआ था। कुछ दिन पूर्व नसीम अहमद ने मोबाइल फोन पर अपनी पत्नी को तलाक दे दिया।