बुखार से अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। सरकारी-निजी अस्पतालों के साथ ही गांव-देहात तक के चिकित्सकों के यहां बुखार के मरीज आ रहे हैं।
एकाएक बढ़े दवा के खर्च से दवा बाजार का गणित भी गड़बड़ा गया है। बाजार से बुखार की दवाइयां गायब होनी शुरू हो गई हैं।
ड्रग विभाग ने इसके चलते दवा कंपनियों को तत्काल दवा सप्लाई करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही दवा की थोक दुकानों के निरीक्षण का निर्णय लिया गया है, ताकि दवा को ब्लैक न किया जा सके।
डेंगू फैल रहा हो या वायरल, मलेरिया हो या टाइफाइड। बुखार की कुछ दवाइयां सामान्य रूप से चलती हैं। ये दवाइयां सभी तरह के बुखार में रोगी को देनी होती हैं।
इनमें कुछ एंटीबायोटिक्स और पैरासिटामोल, क्लोरोक्विन जैसी सामान्य दवाइयां हैं। सरकारी अस्पतालों में भी इन दवाओं की कमी हो गई है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में भी बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही हैं।
निजी अस्पतालों और डिस्पेंसरी चिकित्सकों के यहां भी बुखार की दवाओं की मांग बढ़ गई है। सबसे ज्यादा कमी बच्चों के सीरप की हो रही है।
दवाओं की एकाएक मांग आने से बाजार खाली होते जा रहे हैं। बुखार की सामान्य दवा पैरासीटामोल, बुखार में उल्टी के लिए लगाया जाने वाला इंजेक्शन आनडेम, बुखार में खुजली होने पर दी जाने वाली दवा एट्रेक्स खत्म हो गई है। इन दवाओं का भंडार कंपनियों के पास भी नहीं है। दूसरे राज्यों से दवाओं को मंगवाया जा रहा है।- राजीव त्यागी, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश पदाधिकारी