नोट बंदी का असर किसानों पर दिखाई देने लगा है। हालत यह है कि पशुओं के लिए चारा खरीदने तक के रुपये नहीं बचे हैं। चारा व्यापारियों ने पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेना बंद दिया है। परेशान किसानों को चारा उधार लेना पड़ रहा है। बैंकों की लंबी लाइन में लगकर पांच सौ और हजार रुपये के पुराने नोट बदलने व जमा करने का समय नहीं मिल पा रहा है।
जनपद गौतमबुद्ध नगर के अधिकांश किसानों की जमीन अधिग्रहीत हो चुकी है, इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में किसान पशुपालन से जुड़े हैं। फायदे का सौदा होने से ऐसे ग्रामीण भी पशुपालन कर रहे हैं, जिनके पास खेती की जमीन नहीं है।
नोट बंदी के बाद से पशुओं के चारे की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। चारा व्यापारियों ने पांच सौ और हजार रुपये के पुराने नोट लेना बंद कर दिया है। परेशानी झेलने के बाद भी किसान केंद्र सरकार के निर्णय को सही नहीं मान रहे हैं।