नोटबंदी के बाद जिले के शिक्षक वेतन फिक्स के चक्कर में फंस गए हैं। इसके कारण सैकड़ों शिक्षकों को नवंबर माह का वेतन नहीं मिल पाया है। कई शिक्षक वेतन फिक्स करने में अनुभाग अधिकारी (एसओ) द्वारा लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं। इस बारे में जब जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कौर वर्मा से बात करने चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
दरअसल, सातवां वेतन आयोग घोषित होने के बाद शिक्षा विभाग को अपने सभी शिक्षकों का मासिक वेतन फिक्स करना पड़ रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार शिक्षकों के वेतन में 13 से 15 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
यानि पुराने जेबीटी का मासिक वेतन 55 हजार रुपये के करीब होगा और नया प्राथमिक शिक्षक भी 38 हजार रुपये पाएगा। इस प्रकार घोषणा के बाद शिक्षकों के वेतन में 7 से 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसके अनुसार वर्ष 2000 व 2004 से पहले के प्राइमरी शिक्षकों की सैलरी 52 हजार रुपये बेसिक तथा 3 हजार रुपये भत्ता मिलाकर 55 हजार रुपये के करीब होगी।
इसके अलावा 1 जनवरी 2016 के बाद भर्ती होने वाले प्राइमरी शिक्षक का बेसिक वेतन 35 हजार 400 रुपये, मास्टर की 44 हजार 900 तथा लेक्करार की 47 हजार 600 रुपये होगा, लेकिन सैकड़ों शिक्षकों को आयोग द्वारा बढ़ाए गए वेतन का फायदा नहीं मिल पाएगा। शिक्षकों का आरोप है कि अनुभाग अधिकारी वेतन फिक्स के काम में लापरवाही बरत रहे हैं। वेतन न मिलने के कारण उन्हें घर चलाने में मुश्किल हो रही हैं।
दो जिला, एक अधिकारी
इन आरोपों के इतर वर्कलोड के कारण भी वेतन फिक्स का काम अधर में लटका हुआ है। क्योंकि अनुभाग अधिकारी के पास फरीदाबाद के साथ पलवल का चार्ज भी है। जिसके कारण उन पर वर्कलोड बढ़ गया है।
जताई थी आपत्ति
एक शिक्षक ने अनुभाग अधिकारी द्वारा घर बुलाकर वेतन फिक्स कराने की शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बारे में मैंने डीईईओ को आपत्ति जताई थी। अध्यापकों से आग्रह है कि वे किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का हिस्सा न बनें।-राज सिंह, जिला प्रधान हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ