नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से सोमवार को अमन व एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में दिल्ली, यूपी, हरियाणा और आसपास के राज्यों से आए सभी धर्म के लोगों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान मॉब लिंचिंग (भीड़ हिंसा) का विरोध किया गया। साथ ही इस पर रोक लगाने के लिए एक प्रभावी कानून बनाने की मांग की गई। इस मौके पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है और वहां के लोग भी हमारे अपने हैं।
कुछ मानवता विरोधी लोग मॉब लिंचिंग के नाम पर देश के अमन-एकता व भाईचारे को खत्म करना चाहते हैं। मदनी ने देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों पर ठगने के आरोप लगाए।
कार्यक्रम के आयोजक व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने बताया कि देश में जारी मॉब लिंचिग की अमानवीय घटनाओं और सांप्रदायिकता के बढ़ते कदम को रोकने के लिए अमन व एकता सम्मेनल को आयोजन किया गया है। इसमें सभी धर्मों के लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया।
इसमें संकल्प लिया गया कि धर्म या राष्ट्रवाद के नाम पर निहत्थे और कमजोर लोगों को मारने, सोशल मीडिया के जरिये जनता में भय और निराशा पैदा करने को घृणित माना जाएगा और इसका विरोध जारी रहेगा।
सभी भारतीय लोग, मानव विरोधी अभियानों से असहमति प्रकट करते हैं। साथ ही महमूद मदनी ने कहा कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ तुरंत प्रभावी कानून बने। इसके अलावा दोषियों को सख्त सजा देने और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर सजा दिए जाने की मांग की गई।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि देश में शांति बनाए रखने के लिए हर जिले और शहर में जमीयत सद्भावना मंच की स्थापना करेगा। इसमें हर वर्ग और धर्म के लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि कुछ लोग भाईचारे को तोड़ना चाहते हैं, लेकिन हिंदु -मुस्लिम एकता की नींव बहुत मजबूत है।
मुस्लिम समुदाय से अपील की गई कि वे विरोधी ताकतों का अहिंसात्मक तरीके से विरोध करें। कार्यक्रम के दौरान मदनी ने कहा कि वे चाहते हैं कि जम्मू- कश्मीर का जमीनी विकास हो ताकि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित और विकसित माहौल मिल सके।
सम्मेलन में स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, डॉक्टर लोकेश मुनि, लामा लव बजांग, आर्कबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कोटो, ज्ञानी रंजीत सिंह के अलावा कई अन्य लोग मौजूद थे।