हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उन व्यक्तियों को स्वचालित रूप से टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की वापसी सुनिश्चित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिन पर कोई कर देनदारी नहीं है और जिन्हें रिफंड पाने के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सरकार से जवाब मांगते हुए अगली सुनवाई छह नवंबर को निर्धारित की है।
याचिका उन व्यक्तियों से संबंधित है जिनके वेतन या आय से टीडीएस काटा जाता है, लेकिन छूटों के बाद वे कर दायरे से बाहर हो जाते हैं और रिफंड के हकदार बनते हैं। वर्तमान में रिफंड पाने के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता आकाश गोयल ने आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 433 को रद्द करने व 5,000 रुपये तक के अदावाकृत टीडीएस को ब्याज सहित तुरंत वापस करने तथा गैर-कर योग्य व्यक्तियों के लिए स्वचालित रिफंड तंत्र बनाने की मांग की है।
याचिका में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में करीब 8.59 करोड़ व्यक्तियों का टीडीएस 5,000 रुपये या उससे कम था जिनमें से लगभग 7.51 करोड़ का टीडीएस 1,000 रुपये या उससे कम था। याचिका में कहा गया, शून्य कर देनदारी वाले व्यक्तियों से धन की निरंतर कटौती और रोके रखना संविधान के अनुच्छेद 265 का स्पष्ट उल्लंघन है।