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Delhi NCR News: दिल्ली के ‘फेफड़ों’ को मिलेगी देसी ताकत, रिज में लगेंगे 1.81 लाख पौधे

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डीडीए ने शुरू किया पारिस्थितिक पुनर्जीवन अभियान, 120 हेक्टेयर में हटेंगी विदेशी प्रजातियां, सितंबर तक चलेगा पौधरोपण
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के ‘फेफड़े’ कहे जाने वाले रिज क्षेत्र को फिर से उसके प्राकृतिक स्वरूप में लौटाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बड़े स्तर पर पारिस्थितिक पुनर्जीवन अभियान शुरू किया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर पहले चरण में रिज क्षेत्र में 1.81 लाख से अधिक देसी प्रजातियों के पौधे और झाड़ियां लगाई जाएंगी। यह अभियान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से 7 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत शुरू किए गए 70 लाख पौधरोपण मिशन का हिस्सा है।
इस मिशन के तहत डीडीए को राजधानी में 23 लाख देसी पौधे लगाने की जिम्मेदारी मिली है। परियोजना के पहले चरण में करीब 120 हेक्टेयर में फैले नानकपुरा रिज, कमला नेहरू रिज, साउथ सेंट्रल रिज और सेंट्रल रिज का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवन किया जाएगा। इसके लिए लगभग 16,240 विदेशी प्रजातियों के पेड़ और झाड़ियों को हटाकर उनकी जगह एक लाख देसी पौधे और 81,700 देसी झाड़ियां लगाई जाएंगी।
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डीडीए के अनुसार, पौधरोपण अभियान जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होकर सितंबर के मध्य तक चलेगा। अब तक दिल्ली में 8,29,313 पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें 35,570 पेड़ और 7,93,743 झाड़ियां शामिल हैं। वहीं, केवल रिज क्षेत्र में अब तक 27,062 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें 12,506 पेड़ और 14,556 झाड़ियां हैं।

पौधरोपण के लिए बरगद, पीपल, नीम, शीशम, अर्जुन, जामुन, ढाक (पलाश), धाऊ और खेजड़ी जैसे देसी वृक्ष चुने गए हैं। वहीं हरसिंगार, करौंदा, फालसा, निर्गुंडी और करी पत्ता जैसी देसी झाड़ियों को भी लगाया जा रहा है। डीडीए का कहना है कि पहले से मौजूद प्राकृतिक देसी वनस्पतियों को सुरक्षित रखते हुए जैव विविधता को और मजबूत किया जाएगा।
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ग्रिड प्लान से बनेगा प्राकृतिक जंगल
इस अभियान में वैज्ञानिक ग्रिड आधारित बहु-स्तरीय पौधरोपण मॉडल अपनाया जा रहा है। प्रत्येक ग्रिड में पांच देसी पेड़ और चार देसी झाड़ियां तय दूरी पर लगाई जा रही हैं, ताकि विकसित होने वाले पेड़ों को पर्याप्त जगह, धूप और पानी मिल सके। नियमित अंतराल पर फाइकस प्रजाति के पौधे भी लगाए जाएंगे। इससे प्राकृतिक जंगल जैसी बहु-स्तरीय संरचना विकसित होगी। इसके परिपक्व होने पर पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास मिलेगा। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, भूजल रिचार्ज बेहतर होगा और मिट्टी के कटाव पर भी रोक लगेगी।
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