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Delhi NCR News: कागज पर हो रहा दिल्ली का विकास, धरातल से मीलों दूर

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मंजूरी के बाद भी 1658 करोड़ की चार बड़ी परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में अटकीं
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। राजधानी में बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद भी उन्हें जमीन पर उतारना आसान नहीं है। दिल्ली सरकार की हालिया परियोजना समीक्षा बैठक में न्यायिक अधिकारियों के लिए द्वारका में आवासीय परिसर, ई-बसों के लिए बिजली एवं चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में छात्र और छात्राओं के हॉस्टल और इंदिरा गांधी अस्पताल द्वारका में मेडिकल कॉलेज समेत करीब 1658 करोड़ रुपये की चार परियोजनाएं अलग-अलग प्रशासनिक चरणों में अटकी मिलीं। कहीं मंजूरी के 15 महीने बाद भी काम आवंटित नहीं हुआ तो कहीं टेंडर दस्तावेज ही अंतिम नहीं हो सके।

मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान कई परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। इन परियोजनाओं की स्थिति से यह भी सामने आता है कि सरकारी परियोजना के लिए वित्तीय मंजूरी मिलना काम शुरू होने की गारंटी नहीं है। मंजूरी के बाद टेंडर दस्तावेज तैयार करने, निविदा जारी करने, काम आवंटित करने और कैबिनेट जैसी प्रक्रियाओं में परियोजनाएं लंबे समय तक फंसी रह सकती हैं। चारों परियोजनाओं की स्थिति अलग है, लेकिन नतीजा एक ही है। मंजूरी और जमीन पर काम शुरू होने के बीच लंबा अंतर।
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बीते साल अप्रैल में मिली कई परियाेजनाओं को मंजूरी, लेकिन धरातल पर एक भी नहीं...

द्वारका सेक्टर-19 में न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर बनाने की परियोजना को अप्रैल 2025 में 171.58 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ मंजूरी दी गई थी। लेकिन जुलाई 2026 की समीक्षा तक परियोजना का काम आवंटित नहीं हुआ है। बैठक में परियोजना में हो रही देरी पर चिंता जताई गई। दिल्ली में शुद्ध इलेक्ट्रिक बसों के लिए बिजली और चार्जिंग व्यवस्था मजबूत करने से जुड़ी परियोजना को भी अप्रैल 2025 में 107.02 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ मंजूरी मिली थी। इसके तहत बीआरपीएल की ओर से द्वारका सेक्टर-22 के क्लस्टर डिपो-1, क्लस्टर डिपो-2, आईएसबीटी और डीटीसी डिपो सेक्टर-8 में बिजली संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जाना है। लेकिन समीक्षा बैठक में परिवहन विभाग ने बताया कि टेंडर दस्तावेज अंतिम किए जा रहे हैं और काम अभी आवंटित नहीं हुआ है। जबकि दूसरी तरफ मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में दो हॉस्टल बनाने की परियोजना भी आगे बढ़ने की प्रक्रिया में अटकी हुई है। छात्रों के हॉस्टल की अनुमानित लागत 304.22 करोड़ रुपये और छात्राओं के हॉस्टल की 269.19 करोड़ रुपये है। दोनों को मिलाकर लागत 573.41 करोड़ रुपये बैठती है।
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806 करोड़ का मेडिकल कॉलेज, कैबिनेट नोट ही प्रक्रिया में

इंदिरा गांधी अस्पताल, द्वारका में मेडिकल कॉलेज बनाने की परियोजना सबसे बड़ी परियोजना है। इसके पहले चरण में ब्वॉयज और गर्ल्स हॉस्टल, फैकल्टी रेजिडेंस और एकेडमिक ब्लॉक का निर्माण प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत 805.99 करोड़ रुपये है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि इस परियोजना का कैबिनेट नोट अभी सबमिशन में है। यानी 805.99 करोड़ रुपये की यह परियोजना अभी उस प्रशासनिक चरण में है जहां अंतिम कैबिनेट प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ सकेगी।
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