दिल्लीवालों ने करीब एक महीने तक तरोताजा आबोहवा में सांस ली है। महीने के ज्यादातर दिनों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक स्तर पर रही। बीच के दो दिन यह अच्छी रही। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी मूल वजह मानसूनी दशाएं हैं। इस दौरान पूरे एनसीआर क्षेत्र में बारिश होने से वायुमंडल धुल गया। वहीं, दिल्ली तक पहुंचने वाली हवाएं भी साफ-सुथरी रहीं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वायु गुणवत्ता सूचकांक के मुताबिक, मंगलवार वायु गुणवत्ता औसत रही, लेकिन 27 में से 19 दिन यह संतोषजनक थी। बीच में 17 व 18 अगस्त को वायु गुणवत्ता अच्छी थी। इस दौरान के छह दिन की आबोहवा औसत दर्ज की रही। बोर्ड का आकलन है कि आने वाले दो दिन में वायु गुणवत्ता कमोबेश मंगलवार जैसी ही रहेगी। इसके बाद इसमें गिरावट आने का अंदेशा है।
सीपीसीबी का आकलन है कि बुधवार को वायु गुणवत्ता में मामूली सुधरकर संतोषजनक रहेगी। बृहस्पतिवार को इसमें मामूली गिरावट आ सकती है और यह फिर औसत स्तर पर रहेगी। हवा में इस वक्त धूल के महीन कणों की मात्रा बहुत कम है। वहीं, दूसरे प्रदूषक भी वायु मंडल में मौजूद नहीं हैं।
टेरी के अर्थ साइंस व क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम के डायरेक्टर सुमित शर्मा बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में बारिश होने से वायुमंडल पूरी तरह धुल गया है। जिन इलाकों से हवाएं दिल्ली की तरफ आती हैं, वहां का वायु मंडल भी साफ-सुथरा है। इससे प्रदूषण के स्तर में गिरावट दर्ज की गई। सुमित शर्मा का मानना है कि अक्तूबर व नवंबर महीने में एक बार फिर वायु गुणवत्ता में गिरावट आएगी, लेकिन पिछले सालों की तुलना में सूचकांक बेहतर हो सकता है। इसकी बड़ी वजह दिल्ली में ट्रकों पर पाबंदी और औद्योगिक इकाइयों को सीएनजी में कनवर्ट किया जाना है।
27 दिन की वायु गुणवत्ता
2 दिन : अच्छी, इंडेक्स 50 से नीचे।
19 दिन : संतोषजनक, इंडेक्स 51-100 के बीच।
6 दिन : औसत, इंडेक्स 101-150 के बीच।