22 वर्षीय राकेश कुमार प्रजापति राष्ट्रपति भवन के दक्षिण ब्लॉक में एक निजी गार्ड के रूप में काम करते हैं। 3 मई को जांच रिपोर्ट में उनको कोरोना पॉजिटिव बताया गया। दिल्ली सरकार ने इनको 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में भेज दिया। अपने अनुभव को साझा करते हुए राकेश ने बताया कि दिल्ली सरकार की मेडिकल टीम नियमित संपर्क में थी। मुझे सामान्य पानी पीने, अपने परिवार के सदस्यों से अलग रहने की सलाह दी। अलग शौचालय का उपयोग करना था। मेडिकल टीम मुझे प्रतिदिन फोन करती थी। केजरीवाल सरकार ने देखभाल के साथ मुझे सभी जरूरतें भी प्रदान कीं। मुझमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। मेडिकल टीम ने मेरे शरीर के तापमान की कई बार जांच की। बाद में मेरे शरीर का तापमान कम हो गया। डॉक्टरों और मेडिकल टीम की दी गई सलाह का पालन करके मैं अब कोरोना से बिल्कुल ठीक हो चुका हूं।
हिमांशु आनंद का कहना है कि उनके पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति की तबीयत खराब हुई थी। 16 अप्रैल को उन्हें लेकर अस्पताल गए थे। जांच रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव निकला। इसके बाद उनकी भी जांच कराई गई, तो उनमें भी कोरोना निकला, जबकि कोई लक्षण नहीं दिख रहा था। चिकित्सकों ने होम आइसोलेशन में रहने को कहा। उन्होंने बताया कि मेरी पत्नी मुझे घर के बाहर से ही खाना दे देती थी। मैं खाना खाने के बाद बर्तन खुद साफ करता था। किसी को अपने पास नहीं आने देता था और न तो अपने बिस्तर के अलावा किसी वस्तु को हाथ लगाता था। इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मेडिकल टीम रोज 2-5 बार बात करती और स्वास्थ्य संबंधित जानकारी प्राप्त करती। अब वह बिल्कुल ठीक हैं और होम आइसोलेशन से बाहर हैं।
पहाड़गंज के नदीम का कहना है कि मेरे पड़ोस में एक व्यक्ति को कोरोना हो गया था। दिल्ली सरकार की मेडिकल टीम ने उस व्यक्ति की वजह से आसपास के लोगों की भी जांच की थी। जांच रिपोर्ट में मुझे पॉजिटिव बताया गया। इसके बाद मुझे होम आइसोलेशन में रहने का निर्देश दिया गया। मैंने अपने घर के एक कमरे में खुद को अलग कर लिया। मेडिकल टीम मुझे प्रतिदिन कम से कम दो बार फोन करती थी। सुबह-शाम खाने में हरी सब्जी और फल लेने के लिए कहा जाता था। साथ ही अधिक से अधिक सामान्य पानी पीने के लिए भी कहा जाता था। मैं हमेशा मुंह पर मास्क और हाथ में ग्लव्स पहनकर रखता था। मेरी जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर करीब 20 दिन बाद होम आइसोलेशन से बाहर कर दिया गया।
प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करने को कहा
मिथिलेश का कहना है कि मेडिकल टीम मुझे नियमित रूप से सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने के बारे में मार्गदर्शन करती थी। डॉक्टर मेरे स्वास्थ्य पर नियमित रूप से फॉलोअप लेते थे, चाहे मुझे कोई भी समस्या हो। उन्होंने कहा कि जब मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो मुझे सिर्फ एक पौष्टिक आहार और कुछ दवाओं के खाने की सलाह दी गई थी। मुझे लगातार गर्म खाना खाने और गर्म पानी पीने के लिए कहा गया। उन्होंने मुझे नाश्ते में प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करने को कहा।
मीना एक आशा कार्यकर्ता और कोविड योद्धा हैं। 3 मई को जांच रिपोर्ट में उनको कोरोना पॉजिटिव बताया गया। इसके बाद वह होम आइसोलेशन में रहीं। उन्होंने बताया कि दिन में दो बार सीएम की स्वास्थ्य टीम से नियमित कॉल आती थी, जिसमें वे किसी भी लक्षण और मेरे स्वास्थ्य से संबंधित सवाल पूछते थे। मीना के मुताबिक कि होम आइसोलेशन में रहकर मैं अब ठीक हो गई हूं, लेकिन मैं लोगों को बताना चाहती हूं कि यदि आप संक्रमित हैं तो भी घबराएं नहीं। घर पर रहकर इसका इलाज कर सकते हैं। चूंकि वायरस का अभी कोई टीका नहीं है, इसलिए हल्के या कोई लक्षण नहीं होने की स्थिति में होम आइसोलेशन प्रोटोकॉल का पालन करना सबसे अच्छा तरीका है।
मोहम्मद रजा का कहना है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पहले वे घबरा गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें समझाया। उनकी सलाह पर उन्होंने घर में खुद को अपने परिवार से अलग कर लिया। एक सदस्य उन्हें खाना देता था। वह खाने के बर्तन खुद साफ करके अपने कमरे में ही रख लेते थे। वह सुबह उठने के बाद गर्म पानी में सेंधा नमक डालकर गरारे करते थे। दिन में तीन बार गरारे कर रहे थे। इसके बाद एक से डेढ़ लीटर गर्म पानी पीते थे और 4 से 5 लीटर सामान्य पानी पी रहे थे। खाने में हरी सब्जी प्रतिदिन ली और फल भी लिए। प्रतिदिन ताजा ही खाने का सेवन करते थे और कोई भी दवा नहीं ली। वह करीब 20 दिन तक होम आइसोलेशन में रहे, लेकिन एक दिन भी उन्हें छींक तक नहीं आई और 20 मई से वह होम आइसोलेशन से बाहर हो गए हैं।