अव्यवस्थाओं के पर्याय बने दिल्ली के चिड़ियाघर में अनियमितताओं का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बैठक बुलाई है।
उधर कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों के चलते दिल्ली प्राणी उद्यान को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) को सौंपने की प्रक्रिया में अब अड़ंगा लग गया है।
सूत्रों ने बताया इस बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो, पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों समेत सीजेडए और दिल्ली चिड़ियाघर के अधिकारी मिल बैठकर समस्या का समाधान निकालेंगे। प्राणी उद्यान में अनियमितता और अव्यवस्था के चलते लगातार जानवर कम हो रहे हैं।
सूत्रों ने स्वीकार किया कि वित्तीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक अनियमितताओं की विभिन्न रिपोर्टों के बाद दिल्ली के इस प्राणी उद्यान से मुक्ति के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले महीने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को सौंपने की घोषणा की थी। लेकिन इसकी कानूनी जटिलताओं को देखते हुए अब पर्यावरण मंत्रालय अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक अगर मंत्रालय को सीजेडए अधिकारियों से दिल्ली चिड़ियाघर चलवाना है तो इसके लिए अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार देने होंगे। इसके अलावा एक सोसाइटी का गठन करके भी इस प्राणी उद्यान को चलाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए बहुत काम किए जाने की जरूरत होगी।
इसमें प्रबंधन और सोसाइटी के गठन केलिए उसके पंजीयन से लेकर सोसाइटी के नियम और कानून और वित्तीय स्थिति को स्पष्ट करना होगा। केंद्र सरकार से अनुमति के लिए प्रस्ताव तैयार करने जैसे लंबी प्रक्रिया के कामों को अंजाम देना है। इसके अलावा एक अंतिम विकल्प के तौर पर दिल्ली सरकार से भी चिड़ियाघर संचालन के लिए कहा जा सकता है।
दिल्ली चिडिय़ाघर में अनियमितताओं को लेकर जनवरी 2019 में उस समय सीजेडए के सदस्य सचिव डीएनसिंह ने तमाम अनियमितताओं का खुलासा किया था।