केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इस रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली में 14 वर्ष तक की आयु की 15 बेटियां और 21 बेटों ने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का निर्णय लिया, जबकि 14 से 18 वर्ष के बीच 65 लड़के और 54 लड़कियों ने आत्महत्या की।
ये आंकड़े पूरे देश के सभी मेट्रो व महानगर में सर्वाधिक हैं। जबकि वयस्कों की बात करें तो 18 से 30 वर्ष के बीच आत्महत्या करने वाली महिलाएं 281 और पुरुष 425 हैं।
राज्यवार आत्महत्या की स्थिति
आत्महत्या को लेकर राज्यवार स्थिति देखें तो 16 राज्यों को केंद्र ने चिन्ह्ति किया है। इनमें महाराष्ट्र में सर्वाधिक 16970 लोगों ने आत्महत्या की। इनके अलावा तमिलनाडु (15777), पश्चिम बंगाल (14602), कर्नाटक (10786), मध्यप्रदेश (10293) और तेलंगाना (10140) शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। जबकि केरल (7692), गुजरात (7246), छत्तीसगढ़ (7118), आंध्र प्रदेश (6226), यूपी (3902), हरियाणा (3545), राजस्थान (3457), असम (3231), ओडिशा (4087) और पंजाब में 1049 लोगों ने आत्महत्या की।
चौंकाने वाली है स्थिति, सतर्कता की जरूरत
क्लीनिकल रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयोजक डॉ. विकास ढिकव बताते हैं कि अभी तक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं था, लेकिन केंद्र सरकार की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। स्कूल और कॉलेज जाने वाली उम्र के बच्चे आत्महत्या के लिए कदम उठा रहे हैं। इसके पीछे पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ तो मुख्य वजह है ही। साथ ही अन्य कई कारण ऐसी स्थिति में काम करते हैं। अगर परिवार चाहे तो सतर्कता रख अपने बच्चों को बचा सकते हैं। उन्हें फिजूल के तनाव से दूर रख सकता है।