साबिर नक्काल समुदाय (किन्नरों के साथ ढोलक बजाने वाले) से संबंध रखता था। वह हाईफाई इलाकों में सैलून पर काम करता था। रोहित भी उसके साथ ही सैलून पर काम करता था। वहीं दिलशाद शादी समारोह में पान का स्टाल लगाता था। बिलकीस के कहने पर साबिर ने दिलशाद की हत्या की योजना बनाई। रोहित को एक लाख रुपये की बात कर साजिश में शामिल किया गया। 27 दिसंबर को रोहित ने शादी समारोह में स्टाल लगाने की बात कर दिलशाद को द्वारका बुला लिया।
बाद में एक खाली प्लॉट में ले जाकर रोहित ने एक तार से दिलशाद का गला घोंट दिया, जबकि साबिर ने बर्फ तोड़ने वाले सुंए से अंधाधुंध वारकर दिलशाद को मौत के घाट उतार दिया। बाद में शव को वहीं झाड़ियों में ठिकाने लगाने के बाद आरोपी वहां से आ गए। दो दिन बाद बिलकीस ने पुलिस को गुमराह करने के लिए नंद नगरी थाने में दिलशाद की गुमशुदगी दर्ज कराई।