हिंसा से प्रभावित मुस्तफाबाद इलाके में स्थित ईदगाह के शिविर में तनावपूर्ण माहौल के बीच शुक्रवार को भीगी पलकों के साथ जब एक युवती की विदाई हुई तो कैंप में मौजूद अन्य पीड़ितों की भी आंखें झलक उठीं। हिंसा पीड़ित शबीना से निकाह करने मूल रूप से मुरादाबाद के रहने वाले शहनवाज पहुंचे। निकाह की सभी पारंपरिक रस्में शिविर में हुई जिसके बाद शबीना को ब्याहकर शहनवाज ले गए।
शबीना की बहन सोनी ने बताया कि कुछ माह पहले ही बहन का निकाह मुरादाबाद के रहने वाले शहनवाज से तय हुआ था। ऐसे में इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। आगामी अप्रैल माह में निकाह करने पर दोनों परिवारों में रजामंदी हुई थी, लेकिन हिंसा के कारण निकाह को टालना पड़ा। ऐसे में अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं तो परिजनों ने निकाह करने का निश्चय किया। इस दौरान लड़के वालों से बात कर एक बार फिर निकाह की तारीख तय की और शुक्रवार को निकाह हुआ।
कैंप सहित आसपास के लोगों ने पहुंचकर दिया आशीर्वाद
निकाह के दौरान कैंप में मौजूद पीड़ित समेत आस-पास के लोगों ने पहुंचकर शबीना का नकद राशि व अन्य सामान के रूप में अपना आशीर्वाद दिया। शबीना के परीजनों ने कहा कि कभी सोचा नहीं था कि बेटी के निकाह में इतनी अधिक संख्या में लोग आशीर्वाद देने के लिए पहुंचेंगे। सभी लोगों ने यहां पहुंचकर बेटी के प्रति प्रेम व्यक्त किया है। इसमें कई लोग ऐसे थे जो अपनी मर्जी से बेटी को आशीर्वाद देने के लिए पहुंचे थे।
निकाह का जोड़ा भी लूट ले गए दंगाई
निकाह के लिए लड़के वालों ने जो जोड़ा तैयार कर लड़की वालों को दिया था, दंगाई लूटपाट के दौरान उसे भी लूट कर ले गए। परिजनों ने बताया कि निकाह के लिए जेवर समेत कपड़े तैयार करवाए थे, लेकिन हिंसा के दौरान दंगाई पूरा समान लूट ले गए। इस वजह से कुछ रुपयों का बंदोबस्त कर बेटी का निकाह किया है।
वक्फ बोर्ड ने एक लाख रुपये देकर की मदद
वक्फ बोर्ड के सदस्य इमरान ने बताया कि चूंकि, हिंसा में पीड़िता का पूरा सामान लूट गया था। जिसके बाद परिजनों के पास निकाह करने के लिए भी जमा राशि नहीं बची थी। इसे देखते हुए वक्फ बोर्ड की ओर से पीड़िता के परिजनों को एक लाख रुपये मदद के तौर पर दी गई है। इसके साथ ही खाने पीने की भी व्यवस्था की गई।
एक ही दिन होना था दोनों बहनों का निकाह
शबीना की बहन सोनी ने बताया कि हिंसा से पहले शबीना व सोनी दोनो बहनों का निकाह 15 अप्रैल को ही होना था। इसके लिए पूरी तैयारी थी, लेकिन हिंसा के कारण हुए नुकसान को देखते हुए अभी एक बहन का ही निकाह किया जा रहा है। हालात बेहतर होने पर दूसरी बहन की भी डोली उठेगी।