दिल्ली में हिंसा को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर पुलिस सख्त हो गई है। पश्चिम जिले में पुलिस ने अफवाह फैलाने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। ख्याला थाना पुलिस ने अफवाह फैलाने के मामले में चार केस दर्ज किए थे जबकि मायापुरी थाने में एक मामला दर्ज है।
रविवार शाम दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा की अफवाह फैल गई थी। कई लोग पुलिस को फोन कर इलाके में हिंसा होने की जानकारी दे रहे थे। लेकिन जब इन सूचनाओं पर पुलिस उन जगहों पर पहुंची तो वहां इस तरह की कोई घटना नहीं हुई थी। स्थानीय लोगों ने साफ तौर पर ऐसी कोई घटना होने से इंकार कर दिया।
पुलिस अधिकारियों की माने तो पुलिस को सूचना देने वालों ने यहां तक बताया कि उनके इलाके में सैकड़ों लोग तलवार लेकर पहुंच गए हैं और हिंसा फैला रहे हैं। लेकिन मौके पर पुलिस को हिंसा को लेकर कोई भी सबूत नहीं मिले।
यूपी पुलिस से सहयोग की मांग
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के आरोपियों की धरपकड़ के लिए दिल्ली और यूपी पुलिस के आला अधिकारियों की बैठक हुई। हिंसा में पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों से आए लोगों के शामिल होने की सूचना के बाद यह कदम उठाया गया।
डीसीपी के कार्यालय में आयोजित बैठक में ज्वाइंट कमिश्नर आलोक कुमार के साथ मेरठ रेंज के आईजी प्रवीण कुमार भी शामिल हुए। इस दौरान हिंसा से जुड़ी कई अहम मुद्दों पर बातचीत की गई। साथ ही उपद्रवियों की पहचान और धरपकड़ से यूपी पुलिस से सहयोग मांगा गया है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी ऑफिस में शुक्रवार को इंटर स्टेट पुलिस मीटिंग हुई, जिसमें उपद्रवियों की धरपकड़ को लेकर चर्चा हुई। हिंसा की जांच में जुटी दिल्ली पुलिस का कहना है एक कुछ उपद्रवी पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासतौर से मेरठ और गाजियाबाद से आए थे। हिंसा करने के बाद वे वापस अपने शहर लौट गए।
ऐसे में उपद्रवियों की पहचान करने और उनको पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस से सहयोग मांगा गया था, जिसके बाद मेरठ के आईजी प्रवीण कुमार और गाजियाबाद के एसपी कई घंटों तक चर्चा करते रहे। इसमें तमाम बिंदुओं को लेकर चर्चा हुई।
उपद्रवियों की पहचान के लिए मेरठ व गाजियाबाद के बॉर्डर इलाकों पर लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाले जा रहे हैं। बैठक में डीसीपी नार्थ ईस्ट वेद प्रकाश सूर्या सहित कई अधिकारी मौजूद थे।